लहंगा साड़ी में होलिका, घुंघराले बालों वाले बटुक प्रह्लाद… इस बार ब्रज की होली में दिखेगा नया रंग

इस बार ब्रज की होली में कुम्हारों ने होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमाओं को नया रूप दिया है. होलिका को लाल लहंगे-साड़ी और प्रह्लाद को घुंघराले बालों वाले बटुक वेष में सजाया गया है. ये आकर्षक मूर्तियां 3-6 फुट की हैं और मथुरा समेत हरियाणा-राजस्थान तक इनकी भारी मांग है. ये अनूठी प्रतिमाएं ब्रज की होली के पारंपरिक उत्सव में नया रंग भर रही हैं.

होलिका की मूर्तियां

वैसे तो ब्रज की होली देश ही नहीं, पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन इस बार ब्रज की होली में कुछ नया ही रंग देखने को मिल सकता है. इसके लिए ब्रज के कुम्हारों और कलाकारों ने भी कमर कस ली है. बाजार में जगह जगह होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं तैयार हैं. इस बार कुम्हारों ने होलिका को जहां लाल रंग के लहंगे और साड़ी में सजाया है तो भक्त प्रह्लाद को बटुक वेष में प्रस्तुत किया है. घुंघराले बालों वाले प्रह्लाद दर्शकों को सहज ही आकर्षित कर रहे हैं.

बाजार में इस समय होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमाएं 3 से 6 फुट तक की उपलब्ध हैं. इनकी कीमत भी दो से 10 हजार रुपये तक रखी गई है. बता दें कि होलिका दहन की रौनक मथुरा के गली मोहल्लों में तय तारीख को ही देखने को मिलती है, लेकिन अंतापाड़ा मोहल्ले में 15 दिन पहले से ही गहमा गहमी शुरू हो जाती है. कुम्हारों के चाक पर नई नई मूर्तियां आकार लेने लगती हैं. हालांकि अब मूर्तियों के बनाने का काम पूरा हो चुका है. अब तो बस इन मूर्तियों को सजाया संवारा जा रहा है.

आकर्षण का केंद्र बनी मूर्तियां

कुम्हारों के चाक पर आकार ले रही होलिका और भक्त प्रहलाद की मूर्तियां इस समय आकर्षण का केंद्र बन रही हैं. कुम्हार और कारीगर इन मूर्तियों को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए रंग रोगन कर चुके हैं. अब इन्हें वस्त्रों से सुसज्जित किया जा रहा है. ज्यादातर मूर्तियों में होलिका को लाल रंग का लहंगा पहनाया गया है. वहीं प्रहलाद बटुक वेष में नजर आ रहे हैं. कारीगरों के मुताबिक मथुरा ही नहीं, आसपास के कई जिलों में यहां बनी मूर्तियों की डिमांड रहती है. यहां तक कि हरियाणा और राजस्थान से लोग आकर यहां से मूर्तियां ले जाते हैं.

होली से एक दिन पहले पूजा

बता दें कि होली से एक दिन पहले विभिन्न चौराहों पर होलिका दहन का आयोजन होता है. इसके लिए ये मूर्तियां चौराहे पर रखी जाती है और सुहागिन महिलाएं पहले होलिका की गोद में भक्त प्रहलाद को बैठाकर पूजन करती हैं. इसके बाद होलिका दहन किया जाता है. इसी दौरान लोग होलिका की गोद से प्रहलाद को निकालकर अपने घर ले जाते हैं. तीन पीढ़ियों से मूर्ति बनाने का काम कर रहे कारीगर रमाशंकर के मुताबिक इस बाद मूर्तियों की डिमांड काफी आ रही है. इसकी वजह से रेट भी अच्छे मिल रहे हैं.