पहले स्पोर्ट्स सिटी, अब गजक सिटी बना अपना मेरठ; GI टैग संग मिली शहर को नई पहचान

मेरठ की गजक को अब प्रतिष्ठित GI टैग मिल गया है, जिससे इसे वैश्विक पहचान मिली है. गुड़ और तेल से हाथ से बनी यह पारंपरिक मिठाई अपनी 30-40 से अधिक किस्मों के लिए प्रसिद्ध है. यह उपलब्धि केवल मेरठ के गजक उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए भी बड़े अवसर खोलेगी. साथ ही इसके निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.

जीआई टैग मिलने पर गजक कारोबारियों ने मनाया जश्न

उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ की पहचान अब तक स्पोर्ट्स सिटी के रूप में होती रही है, लेकिन इस शहर के खाते में एक और उपलब्धि दर्ज हो गई है. इस शहर में बनने वाले गजक को अब जीआई टैग मिल गया है. गुड और तेल से बनने वाले मेरठ के गजक की डिमांड ना केवल देश भर में, बल्कि विदेशों में पहले से रही है. अब जीआई टैग मिलने के बाद इसने दुनिया के प्रसिद्ध खाद्य पदार्थों में अपनी पहचान दर्ज करा दी है.

बता दें कि पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश गन्ना बेल्ट के लिए जाना और पहचाना जाता है. यहां पर गन्ने की पैदावार पूरे विश्व भर में मिठास घोलने का काम करती है. इसी गन्ने से बनाता है गुड और गुड से बनती है गजक. गुड जैसा ठोस होता है, ऐसे गजक ठोस नहीं होती. ये गुड को हाथों से पीट पीट कर तैयार की जाती है. इससे सुखा लिया जाता है और इसको गेंद जैसा आकर दे दिया जाता है. हालांकि अब इस गजक के कई आकर मेरठ में बनने लगे हैं.

40 से अधिक वेराइटी में है गजक

गजक कारोबारियों के मुताबिक मेरठ में गजक कब से बनाया जा रहा है, इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता. हालांकि मुगलों के दौर में इसे खासी प्रसिद्धि मिली थी. इसकी खास बात ये है कि इसको बनाने के लिए केवल हाथों का ही प्रयोग किया जाता है. इसे बनाने में किसी तरह की मशीन का इस्तेमाल नहीं होता. इस समय मार्केट में गजक की 30 से 40 वैरायटी आती हैं. गजक का मुख्य सीजन अक्टूबर से फरवरी तक होता है. इन्हीं छह महीनों में यहां करीब 70 से 100 करोड़ का कारोबार हो जाता है.

विदेशों में बड़ी मांग

स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक मेरठ के गजक की मांग विदेशों में भी है. हालांकि अभी तक इसे वैश्विक आइटम नहीं माना गया था. अब जीआई टैग मिलने के बाद इस उत्पाद ने दुनिया के प्रसिद्ध खाद्य पदार्थों में अपनी जगह बना ली है. जाहिर है कि इससे गजक का निर्यात बढ़ेगा. इससे स्थानीय कारोबार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. मेरठ के रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन ने GI टैग के लिए आवेदन किया था. अब GI टैग मिलने के बाद व्यापारियों में खुशी की लहर है.