थप्पड़ कांड से किसान नेता विवाद तक… मेरठ SSP अविनाश पांडेय हटाए गए, लखनऊ से अटैच

मेरठ के SSP अविनाश पांडेय को उनके पद से हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है. उनके स्थान पर बीबीजीटीएस मूर्ति को नया SSP बनाया गया है. यह फैसला IPS अविनाश पांडेय के 'थप्पड़ कांड' और किसान नेता के साथ कथित मारपीट जैसे विवादों के बीच आया है.

मेरठ SSP अविनाश पांडेय हटाए गए (फाइल फोटो)

मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय को शासन ने हटा दिया है. 2015 बैच के IPS अविनाश पांडेय को अब पुलिस महानिदेशक DGP मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध किया गया है. उनके स्थान पर IPS बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ का नया SSP बनाया गया है. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आए.

जुलाई में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर मेरठ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया था. इसी दौरान SSP अविनाश पांडेय का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुलिस वाहन के पास एक प्रदर्शनकारी/अधिवक्ता को थप्पड़ मारते नजर आए थे.

कोर्ट में याचिका भी हुई दाखिल, कार्रवाई की मांग

वीडियो वायरल होने के बाद मामला प्रदेश की राजनीति में भी गरमा गया. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद समेत विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. बाद में एसएसपी और करीब 50 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एससी-एसटी कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी.

हालांकि, एसएसपी अविनाश पांडेय ने उस समय पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा था कि पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

अब किसान नेता से कथित मारपीट का मामला

थप्पड़ कांड का विवाद पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अगस्त में एसएसपी कार्यालय से जुड़ा एक और गंभीर आरोप सामने आया. भारतीय किसान यूनियन बीआर आंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि वह अपने साथी मोहित जाटव के साथ एक गैंगस्टर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग लेकर SSP कार्यालय पहुंचे थे.

दिग्विजय भाटी के मुताबिक, उनके पहुंचने के कुछ देर बाद SSP अविनाश पांडेय कार्यालय पहुंचे. आरोप है कि नाम सुनते ही SSP नाराज हो गए और दोनों के साथ मारपीट की गई. इसके बाद उन्हें SOG कार्यालय ले जाया गया, जहां भी कथित तौर पर पिटाई किए जाने का आरोप लगा. मामले की जानकारी मिलने पर सपा विधायक अतुल प्रधान भी थाने पहुंचे थे.

आरोपों को अविनाश पांडेय ने सिरे से खारिज किया

हालांकि, इन आरोपों को अविनाश पांडेय ने सिरे से खारिज किया. उनका कहना था कि दिग्विजय भाटी एक हिस्ट्रीशीटर के साथ पुलिस कार्यालय पहुंचे थे और वहां उनके साथ विवाद कर रहे थे. इसी वजह से उन्हें हिरासत में लिया गया था. एसएसपी के मुताबिक, बाद में उन्हें सकुशल घर भेज दिया गया और मारपीट या थर्ड डिग्री देने जैसी कोई घटना नहीं हुई.

पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच शासन ने बड़ा फेरबदल किया. हालांकि शासन की ओर से तबादले को प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर किया गया है, लेकिन अविनाश पांडेय का स्थानांतरण ऐसे समय हुआ है जब उनके कार्यकाल से जुड़े दो बड़े विवाद लगातार चर्चा में थे.

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