कानपुर में बसाए जाएंगे बांग्लादेशी हिंदू! गुजारे के लिए रोजगार भी मिलेगा, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मेरठ के 99 बांग्लादेशी हिंदू परिवारों को कानपुर में पुनर्वासित करने की मंजूरी दे दी है. ये परिवार 40-50 सालों से मेरठ में रह रहे हैं और अब कानपुर में बसने के लिए एक एकड़ जमीन व रोजगार की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिली है, जिससे उनके भविष्य की नई राह खुलेगी.

बांग्लादेशी हिंदू परिवार

मेरठ के 99 बांग्लादेशी हिंदू परिवारों को पुनर्वासित किया जाएगा. इनका पुर्नवासन कानपुर में हो सकता है. इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है. इस संबंध में विधायक और यूपी सरकार में मंत्री दिनेश खटीक ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था. इसमें इन बंगाली परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करने की बात कही गई थी. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई.

मेरठ में मवाना के नगला गोसाई में 40-50 सालों से रह रहे इन बंगाली हिंदू परिवार के लोगों ने अपने पुर्नवास के लिए सरकार से कानपुर में एकड़ जमीन की मांग की थी. इसके साथ ही अपने गुजारे के लिए रोजगार की भी मांग की थी. सरकार ने उनकी मांगों पर सहमति जताते हुए इस संबंध में उचित प्रबंधन करने का आश्वासन दिया है. इन बंगाली परिवार के लोगों ने बताया कि उनका बचपन मेरठ के पास हस्तिनापुर में बीता है. वहीं पर वह 40 से 50 सालों से रहते आ रहे हैं.

पहले हस्तिनापुर में रहने देने की थी मांग

इन बांग्लादेशी हिंदू परिवारों ने सीएम योगी से हस्तिनापुर में ही रहने देने की गुहार की थी. अपनी बसावट के लिए इन परिवारों ने एक एकड़ जमीन की मांग की थी. चूंकि सरकार ने इनका पुर्नवास कानपुर में करने का फरमान सुनाया था, इसलिए इन परिवारों ने आग्रह करते हुए कहा था कि बिना रोजगार के वह कानपुर जाकर क्या करेंगे. यदि सरकार उन्हें कानपुर भेजना ही चाहती है तो लगे हाथ रोजगार की भी व्यवस्था कर दे.

झील की जमीन पर बसे हैं ये परिवार

बांग्लादेश की आजादी के वक्त हिंसक घटना के दौरान वहां से आए ये 99 हिंदू परिवार अभी मेरठ में झील की ज़मीन पर रहकर अपना गुजर बसर कर रहे हैं. पिछले दिनों लोकल विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश खटिक ने इनके पुर्नवास का भरोसा दिया था और इस संबंध में सीएम योगी को पत्र लिखा था. अब सरकार ने इसी पत्र पर संज्ञान लेते हुए इनके पुर्नवास को मंजूरी दी है.