कांवड़ मार्ग पर तेंदुए की दहशत, खुद ट्रैंक्विलाइजर लेकर निकले DFO; जारी की एडवाइजरी

मुरादाबाद के कांवड़ मार्ग पर तेंदुए की दहशत ने कांवड़ियों और ग्रामीणों को चिंतित कर दिया है. डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह खुद ट्रैंक्विलाइजर गन के साथ टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. वन विभाग ने गन्ने के खेतों से सटे इलाकों में विशेष गश्त बढ़ा दी है और कांवड़ियों व स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है. सतर्कता और समूह में रहना ही तेंदुए से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.

मुरादाबाद में आदमखोर तेंदुआ

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कांवड़ मार्ग पर तेंदुए की दहशत पैदा हो गई है. खासतौर पर ठाकुरद्वारा रेंज और रामगंगा नदी के तटीय इलाके में तेंदुओं की बढ़ती विजिबिलिटी से ग्रामीणों के साथ ही कांवड़ियों में दहशत की स्थिति बन गई है. बिजनौर, उत्तराखंड और कॉर्बेट क्षेत्र से सटे होने तथा व्यापक गन्ना-बाहुल्य बेल्ट होने के कारण तेंदुओं को छिपने और शिकार करने के लिए अनुकूल माहौल मिल रहा है. हाल ही में खेत में काम कर रही एक महिला पर तेंदुए के हमले में हुई दुखद मौत के बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है.

डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि तेंदुए को ट्रैक और ट्रैंक्विलाइज करने या पिंजरा लगाकर पकड़ने के लिए विभागीय टीमें लगातार प्रयासरत हैं. इसके अलावा, मुरादाबाद-हरिद्वार स्टेट हाईवे और कांवड़ मार्ग से सटे गन्ने के खेतों को देखते हुए वन विभाग ने विशेष गश्त और साइनेज बोर्ड्स के जरिए श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को जागरूक करना शुरू कर दिया है, ताकि जान-माल की हानि को रोका जा सके. डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह के अनुसार, तेंदुए से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता और समूह में रहना है.

करीब जाने पर ही हमला करता है तेंदुआ

उन्होंने बताया कि गन्ना-बाहुल्य और घने झाड़ियों वाले क्षेत्रों में अचानक तेंदुए के करीब पहुंचने पर ही तेंदुआ हमला करता है. वह कभी 50 से 100 मीटर की दूरी रहने पर या दौड़ाकर हमला नहीं करता. विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे खेतों के आसपास या सुनसान रास्तों पर अकेले न जाएं. रात में भी घर के बाहर सोने से बचें. गन्ने के खेतों में काम करते समय कम से कम 3-4 लोगों के समूह में रहना सुरक्षित होगा. कांवड़ पथ और हाईवे पर पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था की गई है, फिर भी श्रद्धालुओं से दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने और सतर्क रहने की अपील की गई है.

वन विभाग ने बढ़ाई गश्त

तेंदुओं की धरपकड़ के लिए वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाए हैं. कर्मचारियों द्वारा नियमित गश्त की जा रही है. डीएफओ ने कहा कि जैसे ही किसी क्षेत्र से तेंदुए की सूचना या वीडियो संज्ञान में आती है, तत्काल टीम भेजकर गश्त बढ़ा दी जाती है. उच्च स्तर पर अतिरिक्त संसाधनों की मांग की गई है ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके है. प्रशासन का मुख्य जोर कांवड़ यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने और ग्रामीणों को तेंदुए के प्राकृतिक व्यवहार के प्रति जागरूक करके हादसों पर अंकुश लगाने पर है.

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