टोल फ्री हुआ लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, जगह-जगह सड़क धंसने के बाद फैसला

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे को बार-बार सड़क धंसने की घटनाओं के बाद टोल फ्री कर दिया गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने गुणवत्ता में कमी के चलते यह फैसला लिया है. एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी PNC को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और उसके प्रोजेक्ट मैनेजर व इंजीनियरों को हटाया गया है. मरम्मत का खर्च कंपनी उठाएगी. यह कार्रवाई हाल ही में उद्घाटन हुए एक्सप्रेस-वे पर हुई अनियमितताओं के बाद की गई है.

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे को टोल फ्री कर दिया गया है. बारिश में सड़क बार-बार धंसने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बुधवार को यह फैसला लिया है. इस फैसले के तहत एक्सप्रेस-वे की मरम्मत का काम पूरा होने तक टैक्स वसूली पर रोक लगाई गई है. इसी के साथ NHAI ने एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया है. अब कंपनी को NHAI की ओर से कोई नया काम नहीं मिलेगा.

इसी क्रम में एनएचएआई ने प्रोजेक्ट मैनेजर और 2 इंजीनियरों को भी हटा दिया है. बता दें कि 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य हाल ही में पूरा हुआ है. करीब 4,700 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस सड़क का 23 दिन पहले इसका केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उद्घाटन किया था. एक्सप्रेस-वे को आगरा की PNC कंपनी ने बनाया है. PNC के मालिक भाजपा के राज्य सभा सांसद नवीन जैन के भाई प्रदीप जैन हैं.

मरम्मत में खर्च होंगे 3 करोड़

NHAI के रीजनल अफसर गौतम विशाल ने इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. बताया कि एक्सप्रेस-वे की गड़बड़ियां ठीक करने में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च होंगे. इसका खर्च भी कंपनी को ही उठाना होगा. 26 जुलाई को एक्सप्रेस-वे के किलोमीटर 64 के पास स्लिपेज मिला था. इसे तुरंत ठीक कराया गया है. इसके अलावा जहां भी इस तरह की ऐसी शिकायत मिली, वहां लगातार सुधार कराया जा रहा है.

एक्शन में एनएचएआई

उन्होंने बताया, ‘PNC कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंजीनियर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है. इन्हें अगले 2 साल तक NHAI के किसी भी प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किया जाएगा. NHAI की ओर से प्रोजेक्ट मैनेजर रहे नकुल प्रकाश वर्मा को भी उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है. एक्सप्रेस-वे के निर्माण के दौरान सौरभ चौरसिया भी प्रोजेक्ट मैनेजर रहे थे. लापरवाही के मामले में दोनों को नोटिस जारी किया गया है.

कहां-कहां धंसा एक्सप्रेस-वे

  • किमी 31: बिना कट वाली जगह पर खड़े ट्रक का पहिया सड़क धंसने से नीचे चला गया
  • किमी 37.7: असोहा के कांथा गांव के पास सड़क धंस गई
  • किमी 39.7: दो दिन पहले डाली गई डामर की परत दब गई. यहां मिट्टी कटने से गड्ढा भी बन गया
  • किमी 62.3: यहां सड़क छठी बार धंसी है. 4 मीटर हिस्से में दरारें पड़ गईं। बाईपास की ओर 15 मीटर हिस्सा दबने से गड्ढा बन गया उन्नाव लेन पर भी तीन जगह दरारें आ गईं
  • किमी 64: यहां 200 मीटर लंबा पुल है. सड़क का हिस्सा उखाड़कर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है और दोबारा मरम्मत की जा रही है.
  • किमी 65 से 65.2: अचलगंज के बेहटा गांव के पास करीब 200 मीटर हिस्से में सड़क धंस गई.
  • किमी 67: 5 किमी के डायवर्जन वाले हिस्से में फिर सड़क धंसने की समस्या सामने आई
  • किमी 72: डिवाइडर की दीवार का करीब 2 फीट प्लास्टर टूटकर गिर गया
  • तस्वीर में दिख रहा है कि एक्सप्रेस-वे के किनारे की सड़क भी धंस गई है
  • तस्वीर में दिख रहा है कि एक्सप्रेस-वे के किनारे की सड़क भी धंस गई है

देश का पहला बैरियर लेस एक्सप्रेस-वे

इस एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास 5 जनवरी, 2022 को किया गया था. 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी ने इसका उद्घाटन किया. इस हिसाब से एक्सप्रेस-वे 1,650 दिन में बनकर तैयार हुआ. यह देश का पहला बैरियर-लेस एक्सप्रेस-वे है. एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया वाहनों की एंट्री नहीं है. इस पर वाहन अधिकतम 120 kmph की रफ्तार से दौड़ सकते हैं. टोल प्लाजा से 500 मीटर पहले लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और फास्टैग रीडर बिना गाड़ी रोके अपने आप टोल काट लेते हैं. अगर हादसा होता है, तो AI कैमरे NHAI कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजते हैं.

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