मुरादाबाद में तेंदुए के खौफ पर सियासत, ST हसन बोले- पिंजरा छोड़ो, गोली मारो; रुचि वीरा ने भी घेरा
मुरादाबाद-बिजनौर में तेंदुओं का खौफ गहराया है, जिससे इंसानी जानें जा रही हैं. पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने आदमखोर तेंदुओं को सीधे खत्म करने की अजीब मांग की है. वहीं, सांसद रुचि वीरा ने प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाएं. यह मुद्दा अब गंभीर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है.
मुरादाबाद और बिजनौर के सीमावर्ती इलाकों में तेंदुए का बढ़ता खौफ अब गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. आबादी वाले इलाकों तक तेंदुए की मौजूदगी ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है. महिलाओं और बच्चों पर हमलों की घटनाओं के बीच अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेने लगा है. पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने तो ‘शूट करने’ तक की मांग कर दी है.
सपा नेता एसटी हसन ने अजीब मांग करते साफ किया कि इंसानी जान बचाने के लिए हमलावर तेंदुए को जिंदा पकड़ने के बजाय सीधे शिकारियों के हवाले कर खत्म (एलिमिनेट) कर दिया जाना चाहिए. वहीं, वर्तमान सांसद रुचि वीरा ने प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाए. साथ ही गश्त, सर्च लाइट, पिंजरे और इलाकों में रोशनी की व्यवस्था करने की मांग की.
‘इंसानी जान से बढ़कर कुछ नहीं, मारो गोली’
वहीं, अब दोनों नेताओं के बयान इस बात की तस्दीक करते हैं कि क्षेत्र में तेंदुए की समस्या किस कदर भयावह हो चुकी है. एसटी हसन ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में घरों की छतों पर तेंदुए का घूमना और इंसानी जानों का नुकसान होना बेहद अफसोसनाक है. प्रशासन द्वारा पिंजरे लगाने की तमाम कोशिशें पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं.
उन्होंने कहा कि जब इंसानी जान पर बन आए, तो उससे बढ़कर कुछ नहीं होता है. उन्होंने अनोखी मांग रखते हुए कहा कि इंसानी जिंदगियां लेने वाले तेंदुओं को तुरंत एलिमिनेट (खत्म) कर देना चाहिए. इसे शिकारियों के हवाले कर मार दिया जाए, क्योंकि तेंदुए की जान से कहीं अधिक अहमियत इंसानी जान की है और इसमें कोई बुराई नहीं है.
‘सड़क से सदन तक उठाई आवाज, सरकार सो रही’
सांसद रुचि वीरा ने तेंदुए के आतंक को गंभीर और दुखद स्थिति बताया. सांसद ने कहा कि जंगल छोड़ गन्ने के खेतों को ठिकाना बना चुके तेंदुए अब घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों पर हमला कर रहे हैं. कांठ, ठाकुरद्वारा और बढ़ापुर जैसे प्रभावित क्षेत्रों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 4 अप्रैल को सदन में यह मुद्दा उठाया था.
साथ ही कहा, ‘वन मंत्री को लिखित पत्र सौंपा और ‘दिशा’ की बैठक में भी मांगें रखीं, लेकिन सरकार सो रही है.’ रुचि वीरा ने प्रभावित सीमाओं पर सर्च लाइट के साथ कॉम्बिंग बढ़ाने और समय पर पिंजरे लगाने की मांग की. इसके साथ ही सरकार पर कोई ठोस कदम न उठाने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की हैं.
