परोसा भंडारा, अपने हाथों की शिव भक्तों की सेवा; इस मुस्लिम MLA ने कांवड़ियों के लिए खोला दिल
मुरादाबाद के सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान ने कांवड़ यात्रियों को अपने हाथों से भंडारा परोसकर सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया. उन्होंने जोर दिया कि धार्मिक आस्था किसी एक धर्म तक सीमित नहीं होती और इस्लाम सभी धर्मों के सम्मान की शिक्षा देता है. यह पहल हिंदू-मुस्लिम एकता और देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को दर्शाती है, जो नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब है.
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बिलारी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के मुस्लिम विधायक मोहम्मद फहीम इरफ़ान ने कांवड़ियों की सेवा में एक बार फिर अपने दिल और दरवाजे खोल दिए. कांवड़ यात्रा के दौरान उन्होंने ना केवल अपने हाथों शिव भक्तों और कांवड़ियों की सेवा की, बल्कि उन्हें अपने हाथों से भंडारा परोसा. इनके इस धर्माथ काम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेज़ी से वायरल हो रहा है.
इस वीडियो में सपा विधायक कहते हैं कि धार्मिक आस्था और मानवता कभी किसी एक धर्म तक सीमित नहीं होती. कांवड़ यात्रियों की सेवा में जुटे फहीम इरफ़ान ने संदेश दिया कि इस्लाम धर्म और पैगंबर साहब की शिक्षाएं हमेशा हर धर्म का दिल से आदर करना सिखाती हैं. जिस तरह कांवड़ यात्रा में मुस्लिम समाज के लोग आगे बढ़कर सेवा करते हैं, ठीक उसी प्रकार बारावफात और ईद जैसे बड़े त्योहारों के मौके पर हिंदू भाई भी मुस्लिम समाज के जुलूसों का भव्य स्वागत और सम्मान करते हैं.
नफरत फैलाने वालों को दिया संदेश
विधायक के कहा, यही हमारे देश असली ताकत, पहचान और खूबसूरती है. उन्होंने समाज में नफ़रत फैलाने वाले राजनीतिक तत्वों को करारा जवाब देते हुए प्रसिद्ध शायर अल्लामा इक़बाल की मशहूर पंक्तियां दोहराईं. उन्होंने कांवड़ यात्रा की कठिन तपस्या और श्रद्धालुओं की अटूट निष्ठा की खूब सराहना की. कहा कि हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर सैकड़ों किलोमीटर पैदल यात्रा करने वाले शिव भक्तों का अटूट विश्वास यह साबित करता है कि आस्था ईश्वर के प्रति अगाध समर्पण का नाम है.
हर धर्म और परंपरा को मिले सम्मान
विधायक ने कहा कि एक सच्चे मुस्लिम के तौर पर हर धर्म के अनुयायियों और उनकी परंपराओं का सम्मान करना हमारा नैतिक व धार्मिक कर्तव्य है. उन्होंने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं अखिलेश यादव और आज़म ख़ान की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से ही सौहार्द, मोहब्बत और सर्वधर्म समभाव की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रबल पक्षधर रही है. भारत को आजादी अमन, सच्चाई, ईमानदारी और हिंदू-मुस्लिम एकता के बल पर ही मिली थी, यहां ईद, होली, दिवाली सब मिलकर मनाते हैं.
