SSP आवास को भी नहीं छोड़ा! फर्जी दस्तावेजों से 19 साल तक करता रहा वसूली; अब दो सगे भाई गिरफ्तार
मुरादाबाद में पुलिस ने SSP आवास की जमीन पर 19 साल तक फर्जी तरीके से लाखों रुपये किराया वसूलने वाले दो भाइयों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने सरकारी रिकॉर्ड में IPS हाउस के नाम दर्ज जमीन के फर्जी दस्तावेज बना लिए थे. इन शातिरों ने अन्य निजी संपत्तियों पर भी अवैध दावा ठोका था.
मुरादाबाद में सरकारी जमीन के नाम पर फर्जीवाड़े का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां फर्जी दस्तावेजों के सहारे एसएसपी आवास की ज़मीन पर भी अपना दावा ठोक दिया गया था. यही नहीं, करीब 19 साल तक किराए के नाम पर लाखों रुपये की वसूली करते रहे. अब इस मामला में पुलिस ने दो सगे भाई को गिरफ्तार किया है.
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मंडी चौक के बल्लभ मोहल्ला निवासी सुधीर कुमार धवन (67) और सुनील कुमार धवन (63) के रूप में हुई है. जांच में सामने आया कि, आरोपियों ने 1927 से ‘आईपीएस हाउस’ के नाम से दर्ज करीब 15.30 एकड़ जमीन को लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे. और 19 साल तक प्रशासन को गुमराह करता रहा.
19 साल में 28.45 लाख किराए के रूप में वसूले
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल के निर्देशों पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया. आरोप है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए दोनों भाइयों ने साल 2024 तक पुलिस विभाग से करीब 28.45 लाख रुपये किराए के रूप में वसूल किए. इस मामले में थाना सिविल लाइंस के एसएसआई हरेंद्र सिंह की तहरीर पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था.
एसपी सिटी रणविजय सिंह के पर्यवेक्षण में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने न केवल एसएसपी आवास पर अपना अवैध दावा ठोका था, बल्कि शहर की अन्य कीमती संपत्तियों पर भी इसी तरह कब्ज़ा करने की साज़िश रची थी.
चड्ढा कोठी का भी तैयार किए थे फर्जी दस्तावेज
आरोप है कि दोनों भाइयों ने चड्ढा कोठी को भी अपनी निजी संपत्ति बताते हुए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और न्यायालय में वाद दायर किया था. इस मामले में चड्ढा कोठी के मालिक इंद्रजीत सिंह चड्ढा की ओर से भी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था. इसमें दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप भी लगाया गया था.
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में आरोपियों के साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे. यह मामला सिर्फ फर्जी दस्तावेज तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय तक सरकारी संपत्ति से आर्थिक लाभ उठाने का भी है. दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है.
