5 महीने में 22 को सजा-ए-मौत… अब तक 35 को फांसी सुनाने वाले जज से 100 मुकदमे लिए गए वापस
मुजफ्फरनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 5 महीने में 22 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं. उनके करियर में यह आंकड़ा 35 मृत्युदंड तक पहुंच गया है. अब उनकी कोर्ट से 100 मुकदमे वापस ले लिए गए हैं, जिससे वे फिर चर्चा में हैं.
मुजफ्फरनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं. जिले में सिर्फ पांच महीने के कार्यकाल में जस्टिस दिवाकर ने 9 हत्या के मामलों में 22 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं. वहीं, अब तक कुल 35 मृत्युदंड देने वाले इस जज की अदालत से 100 लंबित मुकदमे वापस ले लिए गए हैं.
जिला जज वीरेंद्र कुमार सिंह ने जस्टिस दिवाकर की कोर्ट से 100 लंबित मुकदमे वापस लिए हैं. ये सभी मामले लूट और हत्या से जुड़े हैं. अब इनकी सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में होगी. जस्टिस दिवाकर की कोर्ट में फिलहाल करीब एक हजार मामले विचाराधीन हैं. इनमें कुख्यात चैनू पंडित की पत्रावली भी शामिल है, जिसकी सुनवाई गुरुवार को होनी थी.
नवंबर 2025 में बरेली से ट्रांसफर होकर आए
रवि कुमार दिवाकर नवंबर 2025 में बरेली से ट्रांसफर होकर मुजफ्फरनगर आए थे. जस्टिस दिवाकर को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 नियुक्त किया गया था. अपने इस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई. पहली मौत की सजा उन्होंने 6 अप्रैल को वकील समीर सैफी हत्याकांड में तीन दोषियों को दी थी.
5 महीने के कार्यकाल में 22 को सजा-ए-मौत
- 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में तीन लोग
- 70 हजार रुपये के विवाद में दो लोग
- 28 अप्रैल को शेखर हत्याकांड में प्रेमलाल, फंसाकर राजेश देवी और उनके छह बेटे
- 30 मई को राजीव सैनी हत्याकांड में दो लोग
- 20 जून को मां की पिटाई के विरोध में हुए हत्याकांड में दो युवक
- 17 जुलाई को लूटपाट के विरोध में राजसिंह हत्याकांड में चार लोग
- 12 अगस्त को एक महिला की हत्या में एक आरोपी
- 13 अगस्त को रंजिश में पवन की हत्या में चार लोग
बरेली में 13 मिलाकर पूरे करियर में 35 को फांसी
जस्टिस दिवाकर साल 2009 में न्यायिक सेवा में आए थे. उन्होंने अपने 17 साल के करियर में अब तक 35 दोषियों को मृत्युदंड दे चुके हैं. इनमें से 13 बरेली और 22 मुजफ्फरनगर में सजा पा चुके हैं. हालांकि अभी तक उनकी किसी भी मौत की सजा पर अमल नहीं हो सका है. वहीं, मुकदमा हटने को लेकर वह एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं.
बता दें कि जस्टिस दिवाकर पहले वाराणसी में सिविल जज के रूप में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश देकर राष्ट्रीय चर्चा में आए थे. उस दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ाई गई थी. वहीं, अब वापस लिए गए 100 मुकदमे की सुनवाई नए सिरे से जिला न्यायालय में होगी.
