मरकर भी बचा गए एक जिंदगी! आर्मी अफसर का दिल 11 मिनट में पहुंचा हिंडन से नोएडा
चंडीगढ़ के आर्मी अफसर के अंगदान से नोएडा के मरीज को नई जिंदगी की उम्मीद मिली. पहले दिल को एयरलिफ्ट कर गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट लाया गया. फिर हिंडन एयरपोर्ट से ग्रीन कॉरिडोर के जरिए हार्ट महज 11 मिनट में फोर्टिस अस्पताल पहुंचाया गया.
किसी को जिंदगी देने के लिए सिर्फ जिंदा रहना जरूरी नहीं, कभी-कभी मौत के बाद भी किसी की धड़कनों को बचाया जा सकता है. चंडीगढ़ के एक जांबाज आर्मी अफसर ने अंगदान के जरिए ऐसा ही उदाहरण पेश किया. ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए अंगदान का फैसला लिया था.
AIIMS के पैनल ने प्रक्रिया शुरू की, तभी नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में एक मरीज को तत्काल हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत सामने आई. चंडीगढ़ के आर्मी अस्पताल से हार्ट सुरक्षित निकालकर नोएडा भेजने का फैसला हुआ. पहले दिल को एयरलिफ्ट कर गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट लाया गया. इसके बाद पुलिस ने मिलकर नोएडा तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया.
गाजियाबाद से नोएडा तक 11 मिनट का सफर
गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से नोएडा तक हार्ट को सुरक्षित लाने के लिए गाजियाबाद और नोएडा पुलिस ने मिलकर वो कर दिखाया जो मिसाल बन गया. दोनों जिलों की पुलिस के आपसी तालमेल से एक अभूतपूर्व ‘ग्रीन कॉरिडोर’ तैयार किया गया. गाजियाबाद पुलिस ने भारी ट्रैफिक के बीच महज 9 मिनट 30 सेकंड में एंबुलेंस को मॉडल टाउन गोलचक्कर पहुंचाया.
वहां से नोएडा पुलिस ने कमान संभाली, जिसने सिर्फ डेढ़ मिनट के भीतर दिल को सीधे फोर्टिस अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचा दिया. इस तरह हिंडन एयरपोर्ट से अस्पताल तक हार्ट को पहुंचाने में कुल करीब 11 मिनट लगे.
अस्पताल में पहले से तैयार थी डॉक्टरों की टीम
नोएडा की ट्रैफिक डीसीपी अभय कुमार सिंह ने बताया कि सेक्टर 62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में डॉक्टर की टीम सर्जरी के लिए पहले से तैयार थी. कम समय में गाजियाबाद से नोएडा हार्ट को लाना बड़ा क्रिटिकल था, लेकिन ट्रैफिक पुलिस ने रूट मेप तैयार कर 9 मिनट 30 सेकंड में मिनट अस्पताल में डॉक्टरो तक दिल पहुंचाया.
उन्होंने बताया कि दिल के पहुंचते ही सर्जरी शुरू हुई और मरीज को एक नया जीवन मिल गया. ट्रैफिक पुलिस की इस मुस्तैदी और आर्मी अफसर के इस सर्वोच्च दान की हर तरफ तारीफ हो रही है.
एक फैसले ने बचाई किसी की जिंदगी
इस पूरे घटनाक्रम में आर्मी अफसर के परिवार का अंगदान का फैसला सबसे अहम रहा. आर्मी अफसर का अंगदान और पुलिस का यह ग्रीन कॉरिडोर अब लोगों के लिए मिसाल बन गया है. एक ऐसी कहानी, जिसमें एक जिंदगी खत्म होने के बाद दूसरी जिंदगी को बचाने की कोशिश की गई.