दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अब नहीं भर सकेंगे फर्राटे, समय के साथ बदलेगी स्पीड लिमिट
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अब वेरिएबल स्पीड लिमिट सिस्टम लागू होगा. यह प्रणाली ट्रैफिक के दबाव और समय के अनुसार वाहनों की गति सीमा तय करेगी. इसका उद्देश्य व्यस्त समय में जाम कम करना, सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है. CRRI 3 महीने का अध्ययन करेगा, जिसके सफल रहने पर इसे स्थायी रूप से लागू किया जाएगा. इससे लाखों यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा मिलेगी.
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर दौड़ने वाले वाहनों के लिए जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. अब इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति पूरे दिन एक जैसी नहीं रहेगी. ट्रैफिक के दबाव और समय के अनुसार स्पीड लिमिट तय की जाएगी. इसका उद्देश्य व्यस्त समय में जाम की समस्या को कम करना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के अलावा ट्रैफिक को अधिक व्यवस्थित बनाना है. इस नई व्यवस्था को वेरिएबल स्पीड लिमिट सिस्टम के रूप में लागू करने की तैयारी की जा रही है.
इस परियोजना के तहत केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) 3 महीने का विस्तृत अध्ययन करेगा. अध्ययन के नतीजे सकारात्मक रहने पर इस मॉडल को स्थाई रूप से लागू करने की सिफारिश की जाएगी. यह व्यवस्था ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में पहले से सफलतापूर्वक लागू है. अभी तक दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर पूरे दिन वाहनों के लिए एक समान गति सीमा लागू रहती है. नई व्यवस्था में 24 घंटे को अलग-अलग समय खण्डों में बांटकर प्रत्येक समय के लिए अलग स्पीड लिमिट तय की जाएगी.
जैसा ट्रैफिक प्रेशर, वैसी स्पीड
योजना के मुताबिक रात 12 से सुबह 7 तक जब ट्रैफिक काम रहता है. इस समय में कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 65 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 50 किलोमीटर प्रति घंटा प्रस्तावित की गई है. सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक जब एक्सप्रेसवे पर अधिक ट्रैफिक रहता है तो कारों की गति सीमा 55 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की गति सीमा 45 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी. शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक कारों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा तथा भारी वाहनों के लिए 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा प्रस्तावित है.
अध्ययन में दिखी ट्रैफिक की असली तस्वीर
सीआरआरआई द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे में सामने आया है कि दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे पर लगभग 80% ट्रैफिक कारों का है. जबकि लगभग 20% भारी वाहन और अन्य वाहन चलते हैं. इसमें भी सुबह करीब 7 बजे से ट्रैफिक का दबाव तेजी से बढ़ना शुरू हो जाता है और शाम 7 बजे के बाद कम होता है. विशेषज्ञों ने पाया है कि गाजियाबाद की ओर से 100 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से आने वाले वाहनों की स्पीड अक्षरधाम के पास पहुंचकर धीमी हो जाती हैं. इससे अचानक जाम की स्थिति बन जाती है. इसी प्रकार शाम के समय रिंग रोड की और वाहनों की लंबी कतार देखने को मिलती है.
3 महीने होगा ट्रायल
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान 15 अगस्त से इस परियोजना का ट्रायल शुरू कर सकता है. शुरुआती चरण में यह प्रयोग सराय काले खान से अक्षरधाम तक किया जाएगा. इसके बाद इसे गाजीपुर बॉर्डर तक बढ़ाया जाएगा. इस दौरान यह देखा जाएगा की बदलती गति सीमा का ट्रैफिक यात्रा समय और सड़क सुरक्षा पर कितना प्रभाव पड़ता है. यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो इसे स्थाई रूप से लागू करने के लिए केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी.
नई प्रणाली को लागू करने के लिए एक्सप्रेसवे पर आधुनिक डिजिटल डिस्पले बोर्ड लगाया जा रहे हैं. अक्षरधाम मंदिर और पांडव नगर के पास फुट ओवर ब्रिज के दोनों और बड़े डिजिटल साइन बोर्ड स्थापित किए गए हैं. यह बोर्ड राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एनएचआई के कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे.
ट्रायल के दौरान नहीं होगा कोई चालान
वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि अध्ययन अवधि के दौरान यदि कोई चालक नहीं परिवर्तनीय गति सीमा का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ विशेष रूप से कोई चालान नहीं किया जाएगा. इस दौरान केवल सिस्टम की प्रभावशीलता और व्यावहारिकता का परीक्षण किया जाएगा. चालान की वर्तमान व्यवस्था पहले की तरह ही लागू रहेगी.
इस व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ रोजाना दिल्ली गाजियाबाद नोएडा ग्रेटर नोएडा मेरठ और आसपास के शहरों के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों को मिलेगा. ऑफिस जाने वाले कर्मचारी स्कूल कॉलेज के छात्र व्यावसायिक वाहन चालक और लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को ट्रैफिक जाम में कमी और अधिक सुरक्षित सफर का लाभ मिलने की उम्मीद है.
