CBI अधिकारी बनकर बुजुर्ग को 16 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, झटके 85 लाख रुपये
नोएडा में एक 84 वर्षीय बुजुर्ग को साइबर ठगों ने तकरीबन 16 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग, तस्करी और गिरफ्तारी का डर दिखाकर कुल 85 लाख रुपये लूट डाले. फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
नोएडा में एनटीपीसी के 84 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग अधिकारी को 16 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों ने 85 लाख रुपये ठग लिए. फिलहाल, पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने ने अज्ञात ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस बैंक खातों, कॉल डिटेल और ट्रांजैक्शन ट्रेल की जांच कर रही है. जिन खातों में रकम गई है उन्हें ट्रैक किया जा रहा है और साइबर नेटवर्क के पूरे गिरोह की पड़ताल की जा रही है.
सेक्टर 51 केंद्रीय विहार निवासी धीरेंद्र कुमार के पास एक अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को बेंगलुरु साइबर सेल का अधिकारी बताया. उनसे कहा गया कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ है. आरोप लगाया कि उनके नाम पर मोबाइल खरीद कर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा. इसके बाद कॉल दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर की गई. अब दूसरे शख्स ने खुद को सीबीआई का एसीपी बताया. यहीं से बुजुर्ग को डराने धमकाने का सिलसिला शुरू हुआ.
मनी लॉन्ड्रिंग मानव तस्करी और गिरफ्तारी का डर
ठगों ने बुजुर्ग को बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में जांच चल रही है. सहयोग नहीं करने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. उनकी संपत्ति जब्त होगी और पेंशन तक रोक दी जाएगी. इससे 84 वर्षीय बुजुर्ग इन बेहद घबरा गए. ठगों ने उनसे कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है. इसलिए किसी को इसकी जानकारी ना दें. यही मनोवैज्ञानिक दबाव इस ठगी का सबसे बड़ा हथियार बना.
बताया गया की 7 अप्रैल से लेकर 22 अप्रैल तक लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग से पूछताछ की गई. यह पूरी प्रक्रिया बिल्कुल किसी सरकारी जांच एजेंसी जैसी दिखाई गई ताकि पीड़ित को किसी भी बात का शक ना हो. इस दौरान उनके बैंक खातों निवेश शेयर और जमा पूंजी तक की पूरी जानकारी ली गई. धीरे-धीरे ठगों ने उन्हें रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया.
ऐसे अपने अकाउंट्स में 85 लाख करा लिए ट्रांसफर
ठगों ने पहले चरण में पीड़ित से 30 लख रुपए केरल के एक खाते में ट्रांसफर कराए. इसके बाद उन्हें अपने शेयर और अन्य निवेश भुनाने को कहा गया. पीड़ित ने करीब 60 लाख रुपए निकाल कर अपने बैंक खाते में जमा कराए .इसके बाद 55 लाख रुपए तमिलनाडु के दूसरे खाते में मनी ट्रेल वेरिफिकेशन के नाम पर ट्रांसफर कर लिए. इस तरह कुल 85 लाख रुपए साइबर अपराधियों के खाते में चले गए.
साइबर क्राइम पुलिस ने की ये अपील
इसके बाद जब पीड़ित ने कहा कि अब मेरे पास पैसे नहीं बचे तो साइबर अपराधियों ने उनसे संपर्क तोड़ दिया. तब जाकर बुजुर्ग को लगा कि वह किसी साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं. इसके बाद उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई. साइबर क्राइम थाने ने अज्ञात ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. साइबर थाना प्रभारी ने बताया कि लगातार साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करती है. लेकिन फिर भी यह साइबर अपराधी किसी न किसी बहाने से लोगों को डराकर धमका कर उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लेते हैं. लोगों से अपील है कि वह किसी भी इस तरह के मामलों के बहकावे में न आएं. अगर कोई तरह की कोशिश भी करता है तो डरे नहीं तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें.