नोएडा में मजदूरों से मिलने जा रहे सपा नेताओं को पुलिस ने DND पर रोका, जमकर हुई नोकझोंक
सपा का एक प्रतिनिधिमंडल नोएडा में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों की समस्याओं को समझने और उनके पास पहुंचने वाला था. लेकिन प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर रोक दिया. इस बीच सपा नेताओं और पुलिस के बीत जमकर नोंकझोंक देखने को मिला.
नोएडा में प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों से मुलाकात करने जा रहे समाजवादी पार्टी के नेताओं को दिल्ली-नोएडा के डीएनडी बॉर्डर पर पुलिस ने रोक लिया. इस दौरान पुलिस और सपा के नेताओं के बीच जमकर नोकझोंक देखने को मिली. यहां से पुलिस नेताओं को लेकर पुलिस लाइन ले गई. अब खबर आ रही है कि उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया है.
सपा का एक प्रतिनिधिमंडल नोएडा में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों की समस्याओं को समझने और उनके पास पहुंचने वाला था. लेकिन प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उनकी एंट्री रोक दी. इस प्रतिनिधिमंडल में सपा के कई बड़े और सक्रिय नेता शामिल थे. इनमें माता प्रसाद पांडे, अतुल प्रधान, सुधीर भाटी, आश्रय गुप्ता, शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, राजकुमार भाटी समेत कई नेता शामिल थे.
DND बॉर्डर बना टकराव का केंद्र
डीएनडी बॉर्डर पर पुलिस और सपा नेताओं के बीच काफी देर तक बहस और नोकझोंक देखने को मिला. नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है ताकि मजदूरों की आवाज दबाई जा सके .वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना था कि यह कदम सिर्फ शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था. बता दें कि नोएडा में श्रमिक अपने वेतन और अन्य मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. इसी के समर्थन में सपा ने एक प्रतिनिधिमंडल गठित किया जिसे राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मजदूरों से मिलने भेजा गया था.
सपा के नेताओं ने प्रशासन पर लगाए ये आरोप
सपा नेताओं का कहना है कि सरकार मजदूरों की समस्याओं को नजर अंदाज कर रही है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है. वहीं कुछ नेताओं ने पुलिस पर हाउस अरेस्ट करने का आरोप लगाया है. कई नेताओं का कहना है कि रात में ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत अन्य जगहों पर पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर रखा था. वहीं, आज एक बड़े नेताओं का प्रतिनिधिमंडल नोएडा आ रहा था जहां उन्हें डीएनडी पर रोक लिया गया.
प्रशान का जवाब-कानून व्यवस्था बिगड़ सकती थी
सपा के आरोपों पर प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति बड़ी संख्या में नेताओं के आने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती थी. इसलिए यह कदम जरूरी था. इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPM का प्रतिनिधिमंडल भी श्रमिकों से मिलने के लिए पहुंचा. हालांकि पुलिस ने उन्हें भी डीएनडी बॉर्डर पर रोक दिया. इसके बाद CPM नेता वहीं धरने पर बैठ गए. इससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया.
सियासी आरोप प्रत्यारोप तेज
इस घटना के बाद राजनीतिक बयान बाजी भी तेज हो गई है. सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का काम कर रही है. वहीं प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून व्यवस्था बनाए रखने के तहत की गई है. किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता है. अब इस पूरे मामले के बाद आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों और तेज होने के संकेत हैं. सपा इस मुद्दे को बड़ा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है.
