ऑपरेशन सिंदूर का हीरो ‘द्रोणम’ का अब झांसी में उत्पादन, 8 KM दूर दुश्मन ड्रोन को बना देता है कबाड़
ऑपरेशन सिंदूर में एंटी ड्रोन गन 'द्रोणम' ने खूब तहलका मचाया था. द्रोणम ने पाकिस्तानी ड्रोनों को कबाड़ बनाकर छोड़ दिया था. उसके बाद से यह एंटी ड्रोन गन खूब चर्चा में है. अब सरकार ने इस एंटी ड्रोन गन का झांसी में भी प्रोडक्शन करने का फैसला लिया है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी ड्रोन स्वार्म को नेस्तनाबूद करने वाली भारतीय सेना की एंटी-ड्रोन गन ‘द्रोणम’ का निर्माण अब झांसी में होगा. इसके लिए गुरुत्वा सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को 10 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है. यहां पर 150 करोड़ रुपये के निवेश से प्लांट लगेगा. 380 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा. यह कदम न सिर्फ आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगा, बल्कि सीमा सुरक्षा को नई ऊंचाई देगा.
ऑपरेशन सिंदूर में साबित हुई द्रोणम की ताकत
द्रोणम को ‘ब्लैक गन’ के नाम से भी जाना जाता है. हाल ही में गणतंत्र दिवस परेड में इसे प्रदर्शित किया गया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ड्रोन घुसपैठ को नाकाम करने में एंटी-ड्रोन गन ‘द्रोणम’ ने अहम भूमिका निभाई. चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित इस प्रणाली ने 2024 में 260 से ज्यादा ड्रोन नष्ट किए. पंजाब सीमा पर ड्रोन घुसपैठ को निष्क्रिय करने की दर 3% से बढ़कर 55% हो गई. अब इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन झांसी में शुरू होने से भारतीय सेना को स्वदेशी हथियारों का भरपूर स्टॉक मिलेगा.
दुश्मन ड्रोन को जाम कर देता है
‘द्रोणम’ 1 से 8 किलोमीटर रेंज तक ड्रोन का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करता है. दुश्मन ड्रोन के हार्डवेयर को बेकार कर उसे जाम कर देगा. इससे दुश्मन ड्रोन ना उड़ सकता है, ना ही नियंत्रित हो सकता है. आप ‘द्रोणम’ राइफल की तरह हाथ में पकड़कर, बैगपैक स्टाइल में पीठ पर, वाहन पर, माउंट या स्थायी जगह पर लगाकर 360 डिग्री निगरानी कर सकते हैं. ‘द्रोणम’ ड्रग्स ले जा रहे ड्रोन को आसानी से गिरा देता है. सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों जैसे एयरपोर्ट, पावर प्लांट के इसका इस्तेमाल कारगर साबित होगा.
2026 में 2 कंपनियों को डिफेंस कॉरिडोर के तहत जमीन
यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत साल 2026 की शुरुआत में दो नई कंपनियों को जमीन आवंटित किया जा चुका है. झांसी में गुरुत्वा सिस्टम्स के अलावा लखनऊ में नेक्सा मुंबई को 0.5 हेक्टेयर जमीन दी गई है. नेक्सा एविएशन और रक्षा प्रणालियों के लिए कैलिब्रेशन कंट्रोल पैनल, टेस्ट रिग्स और टेस्ट बेंच बनाती है. इससे 5 करोड़ निवेश और 60 रोजगार का इजाफा होगा. प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक कॉरिडोर में 10,000 करोड़ का निवेश आए और हजारों नौकरियां सृजित हों.
यूपी बन रहा है रक्षा उत्पादन का हब
बता दें झांसी, आगरा, लखनऊ जैसे नोड्स पर रक्षा उत्पादन का हब बन रहा है.गुरुत्वा सिस्टम्स के MD अक्षय जैन ने कहा कि द्रोणम पूरी तरह स्वदेशी है. इसका उत्पादन झांसी में शुरू होने से न सिर्फ सेना मजबूत होगी, बल्कि यूपी का डिफेंस सेक्टर ग्लोबल मैप पर चमकेगा. यह विकास आत्मनिर्भर रक्षा’ की दिशा में बड़ा कदम है. पाकिस्तान-चीन जैसे पड़ोसियों की ड्रोन चुनौतियों का मुकाबला अब घरेलू तकनीक से होगा.
