जौहर यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट से राहत नहीं, याचिका खारिज; अब कमिश्नर कोर्ट पर टिकी निगाहें

रामपुर स्थित मौलाना जौहर अली यूनिवर्सिटी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. हालांकि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि मामला पहले से अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष लंबित है, इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है.

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय Image Credit: फाइल फोटो

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की रामपुर स्थित मौलाना जौहर अली यूनिवर्सिटी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. हालांकि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और स्पष्ट किया कि याचिका केवल उसकी पोषणीयता के आधार पर निरस्त की जा रही है.

मामले की सुनवाई जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह** की डिवीजन बेंच में हुई. दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण ने मौलाना जौहर अली यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 भवनों की जांच के बाद 38 इमारतों को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था. प्राधिकरण का कहना था कि इन भवनों के निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृत नक्शे प्रस्तुत नहीं किए गए.

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

इसी आदेश को चुनौती देते हुए मौलाना अली जौहर ट्रस्ट और अन्य पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी. यूनिवर्सिटी की ओर से पेश अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि इसी मामले में मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर, जो रामपुर विकास प्राधिकरण के अपीलीय प्राधिकारी भी हैं, पहले ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा चुके हैं.

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब सक्षम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष मामला लंबित है और वहां से अंतरिम राहत पहले से प्रभावी है, तब समान राहत के लिए दाखिल यह याचिका पोषणीय नहीं मानी जा सकती. इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी.

क्या अब बुलडोजर चलेगा?

फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी में बुलडोजर नहीं चलेगा, क्योंकि हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बावजूद मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट द्वारा दिया गया अंतरिम स्थगन आदेश अभी भी प्रभावी है. इसलिए रामपुर विकास प्राधिकरण तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं कर सकेगा. अब आगे की कार्रवाई पूरी तरह कमिश्नर कोर्ट में लंबित सुनवाई और उसके अंतिम आदेश पर निर्भर करेगी.

अब आगे क्या होगा?

अब इस पूरे विवाद का अगला चरण मुरादाबाद कमिश्नर की अदालत में चलेगा, जहां रामपुर विकास प्राधिकरण और यूनिवर्सिटी दोनों अपने-अपने साक्ष्य और कानूनी तर्क पेश करेंगे. अगर कमिश्नर कोर्ट अंतरिम रोक हटाती है, तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है. वहीं यदि यूनिवर्सिटी के पक्ष में फैसला आता है, तो ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त भी हो सकता है.

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