SRN में मॉकड्रिल बनी मुसीबत! फायर सिस्टम जांच के दौरान फटी पाइप, अस्पताल में भरा पानी

लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में फायर सेफ्टी जांच अभियान के बीच प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में मॉकड्रिल के दौरान बड़ा हादसा हो गया. सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में फायर सिस्टम की जांच के दौरान पाइप फट गई, जिससे डायलिसिस यूनिट, सीटी स्कैन, एक्स-रे और रजिस्ट्रेशन क्षेत्र में पानी भर गया. मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय यानी एसआरएन अस्पताल में भरा पानी Image Credit:

लखनऊ अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच का अभियान चल रहा है, लेकिन प्रयागराज के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसआरएन में फायर सेफ्टी की पड़ताल ही मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन गई. मॉकड्रिल के दौरान फायर पाइप फट गई और सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में पानी भर गया. सवाल उठ रहा है कि जब जांच के दौरान ही सिस्टम जवाब दे दे, तो आपातकाल की स्थिति में मरीजों की सुरक्षा कितनी भरोसेमंद होगी?

मंगलवार को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय यानी एसआरएन अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच चल रही थी. लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद शासन के निर्देश पर अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जा रहा है. इसी क्रम में अधिकारियों और तकनीकी टीम की मौजूदगी में फायर सिस्टम की मॉकड्रिल शुरू हुई, लेकिन जांच के दौरान ही प्लास्टिक सर्जरी विभाग के पास स्थित पंप हाउस की पाइपलाइन में अचानक लीकेज शुरू हो गई. कुछ ही क्षणों में पाइप तेज दबाव नहीं झेल सकी और फट गई.

किस डिपार्टमेंट में भरा पानी?

इसके बाद पानी का तेज बहाव पूरे परिसर में फैलने लगा. देखते ही देखते अस्पताल के कई महत्वपूर्ण विभाग पानी से भर गए. ओपीडी के बाहर अफरातफरी का माहौल बन गया. डायलिसिस यूनिट, सीटी स्कैन विभाग, एक्स-रे सेक्शन और रजिस्ट्रेशन काउंटर के आसपास पानी जमा हो गया. इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई जगहों पर फिसलन बढ़ने से आवाजाही भी प्रभावित हुई. अस्पताल में मौजूद लोगों के बीच कुछ देर के लिए भ्रम और घबराहट का माहौल भी पैदा हो गया.

मॉकड्रिल के दौरान ही फायर पाइप क्यों फटी?

घटना के समय अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. नीलम सिंह स्वयं फायर सेफ्टी सिस्टम का निरीक्षण करने पहुंची थीं. पाइप फटने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. सफाई कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ को तत्काल मौके पर बुलाया गया. पानी निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान शुरू किया गया. कर्मचारियों ने मशीनों और उपकरणों की मदद से जलभराव को नियंत्रित करने की कोशिश की. करीब दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति सामान्य हो सकी और बिल्डिंग से पानी बाहर निकाला गया.

आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा कितनी पुख्ता है?

राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी मरीज या कर्मचारी को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की तकनीकी तैयारियों और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फायर सिस्टम का मकसद आपात स्थिति में जान बचाना होता है, लेकिन अगर परीक्षण के दौरान ही सिस्टम फेल होने लगे तो वास्तविक आग लगने की स्थिति में क्या होगा? क्या अस्पतालों में लगे फायर सिस्टम का नियमित रखरखाव होता है? और क्या सुरक्षा ऑडिट केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गए हैं?

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