रायबरेली में 9 करोड़ का लोन फ्रॉड, 48 लोगों पर FIR, फेक डॉक्यूमेंट्स के सहारे कर दिया खेल

रायबरेली में जाली दस्तावेजों के जरिए बैंक आफ बड़ौदा की शाखा से नौ करोड़ रुपये काे फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. आशंका है कि इस मामले में बैंक अफसर और कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं. फिलहाल, पुलिस ने 48 आवेदकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है.

रायबरेली में लोन फ्रॉड

रायबरेली में बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा से फेक डॉक्यूमेंट के सहारे 9 करोड़ रुपये के लोन के फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है. अब मुख्य प्रबंधक के तहरीर पर 48 आवेदकों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया गया है. जांच में बैंक कर्मियों की भूमिका खंगाली जा रही है.

जानकारी के मुताबिक जाली दस्तावेजों के जरिए बैंक आफ बड़ौदा की शाखा से नौ करोड़ रुपये का लोन ले लिया गया. आशंका है कि इस मामले में बैंक अफसरों और कर्मचारियों भी शामिल हो सकते हैं. शहर के तारा नगर जेल रोड निवासी और बैंक आफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक मुकेश के मुताबिक 48 खातों में गलत तरीके से आवेदकों-ऋणधारकों ने अपनी पहचान छिपाकर और गलत आइडेंटिटी लगाकर पर्सलोन लोन लिया. यह फर्जीवाड़ा 2024 और 2025 में किया गया है.

पुलिस इस एंगल पर भी कर रही जांच

इस फर्जीवाड़े का खुलासा बैंक ऑफ बड़ौदा के रीजनल कार्यालय की तरफ से गोपनीय जांच में हुआ. अब एफआईआर के बाद मामले की विवेचना सदर कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार सिंह को सौंपी गई है. पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपियों के साथ इस पूरे खेल में शामिल लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

बता दें फर्जीवाड़े के इस मामले का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है. बैंक अफसरों ने इस मामले पर चुप्पी साधी हुई है. इस बारे में बात करने से भी बच रहे हैं. ऐसे में इस मामले को लेकर पूरा खुलासा पुलिस जांच में ही सामने आ पाएगी. शुरुआती जांच में पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जाली दस्तावेजों के जरिए कैसे लोन दे दिया गया. दरअसल, बैंक लोन देने के लिए एक लंबी प्रक्रिया अपनाता है.

बिना किसी के मिले नहीं हो सकता फर्जीवाड़ा

एक रिटायर बैंक अधिकारी का कहना है कि लोन देने से पहले बैंक कर्मचारी संबंधित व्यक्ति के घर जाकर सर्वे करते हैं. संबंधित दस्तावेजों की जांच करते हैं. इसके बाद ही बैंक की तरफ से लोन जारी किया जाता है. ऐसे में बिना किसी बैंक कर्मचारी की भूमिका के ऐसा करना संभव नहीं है. फर्जीवाड़े का साफ मतलब ये हुआ कि किसी ना किसी कर्मचारी ने इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया. बता दें कि कुछ साल पहले प्रयागराज में भी इस तरह का फर्जीवाड़ा हो चुका है.