बलिदान की करें तैयारी… धीरेंद्र शास्त्री के मंच से राजा भैया ने कर दी ऐसी अपील, होने लगी चर्चा

प्रयागराज में धीरेंद्र शास्त्री के मंच से राजा भैया ने सनातन धर्म के लिए बलिदान और हिंदुओं की एकजुटता का आह्वान किया. उन्होंने 'वंदे मातरम' न कहने वालों की आलोचना की और धीरेंद्र शास्त्री के 'जातपात छोड़ो, हिंदू भाई-भाई' के संदेश का समर्थन किया. राजा भैया ने हिंदू राष्ट्र के लक्ष्य को कठिन बताया, कहा कि इसे पाने के लिए त्याग और बलिदान आवश्यक है.

धीरेंद्र शास्त्री के मंच पर राजा भैया

प्रयागराज के अरैल में आयोजित बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा के पूर्णाहुति में गुरुवार को कुंडा विधायक रघराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी पहुंचे. उन्होंने कथा व्यास धीरेंद्र शास्त्री से आर्शीवाद लिया और कथा में उमड़े श्रद्धालुओं को संबोधित भी किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि सनातन अब एक बार फिर बलिदान मांग रहा है. सभी सनातनियों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए.

राजा भैया ने कहा कि देश में फिर से ऐसी परिस्थिति बन गई कि हिंदुत्व और सनातन के ऊपर संकट मंडराने लगा है. उन्होंने कहा कि आप तो तिरंगा लहराते हुए गाते हैं कि दिल दिया है और जान भी देंगे… लेकिन इसी देश में कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें वंदे मातरम कहने में भी जोर लगता है. वह कहते हैं कि जो करना हो कर लो, हम तो वंदे मातरम नहीं गाएंगे. उन्होंने कहा कि चुनाव आ रहा है. इसी चुनाव में ऐसे लोगों को चिन्हित कर लीजिए और उनकी ऐसी-तैसी करने में कोई कसर ना छोड़िए.

धीरेंद्र शास्त्री का किया समर्थन

राजा भैया ने कहा कि हम भले ही 75 फीसदी हैं, बावजूद इसके, चाहें राम नवमी का जुलूस हो या हनुमान जयंती और दुर्गा विसर्जन का, इन सभी मौके पर हमारे ऊपर पत्थर बरसाए जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है कि हम जातियों में बंटे हैं. इसलिए उन्हें धीरेंद्र शास्त्री की बात सही लगती है, जिसमें वह कहते हैं कि- जातपात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वह इनके मंच पर हमेशा आते हैं और हर यात्रा में शामिल होते हैं.

कठिन लक्ष्य है हिंदू राष्ट्र

राजभैया ने कहा कि हिंदुओं को एकजुट होते कोई देखना नहीं चाहता. इसीलिए हिंदू राष्ट्र का लक्ष्य बहुत कठिन है. इसके लिए बलिदान की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमें इसके लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज देश में संविधान लागू है तो इसलिए है कि यहां हिंदू बहुसंख्यक है. आज इस्लाम की कल्पना इस्लामाबाद के बिना हो सकती है, लेकिन दुनिया में सनातन की कल्पना केवल भारत में ही की जा सकती है. उन्होंने कहा कि यदि आप सनाती हैं तो दिखना भी चाहिए. कलावा पहनिए, तिलक लगाइए और अपने विषयों
के लिए हमेशा मुखर रहिए.

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