बिकरू कांड वाली खुशी दुबे के घर आई ‘खुशी’, फर्स्ट डिवीजन पास हुई 12वीं

कानपुर के बिकरू कांड से चर्चित खुशी दुबे ने 12वीं की यूपी बोर्ड परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की है. जेल, कानूनी लड़ाई और पारिवारिक तनाव के बावजूद उन्होंने यह सफलता हासिल की. खुशी अब अपना अतीत भूलकर वकील बनने का सपना देख रही हैं, शिक्षा को अपने नए जीवन का आधार बना रही हैं. उनकी यह उपलब्धि कई लोगों के लिए प्रेरणा है.

खुशी दुबे

यूपी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आते ही उत्तर प्रदेश में बहुचर्चित कानपुर के बिकरू कांड में आरोपी खुशी दुबे के घर जश्न का माहौल बन गया है. इस परीक्षा में खुशी दुबे ने भी 12वीं फर्स्ट डिवीजन से पास कर लिया है. इस रिजल्ट पर उसने खुशी तो जताई है, लेकिन कहा कि उसके लिए यह आसान नहीं था. पहले जेल, फिर कोर्ट कचहरी के चक्कर, इसी में मां की बीमारी और उसका इलाज, परिवार में भी तनाव की स्थिति, बावजूद इसके उसने पूरी मेहनत के साथ 12वीं की परीक्षा की तैयारी की और अब यह सफलता हासिल की है.

बता दें कि विकरु कांड में विकास दुबे के साथी गैंगस्टर अमर दुबे की 3 दिन की ब्याहता पत्नी खुशी दुबे की शादी 19 जून 2020 को हुई थी. अभी तीन दिन की ही दुल्हन थी कि बिकरू कांड हो गया. आरोप है कि उसका पति अमर दुबे दो-तीन जुलाई की रात बिकरू में हुए जघन्य वारदात के दौरान पुलिसकर्मियों की हत्या में विकास दुबे के साथ था. इस वारदात के बाद वह फरार हो गया था, हालांकि बाद में यूपी पुलिस की एसटीएफ ने एनकाउंटर में उसे मार गिराया था.

अमर दुबे को मदद करने का है आरोप

बिकरू कांड के बाद फरार अमर दुबे की मदद का आरोप उसकी पत्नी खुशी दुबे लगा था. इसी मामले में उसे जेल भी भेजा गया था. खुशी को पुलिस ने ऐसे वक्त पर अरेस्ट किया था, जब वह ससुराल से चौथी पर मायके जा रही थी. बाद में जेल से छूटने के बाद अपनी मां की प्रेरणा से खुशी दुबे ने अपनी एक नई जिंदगी की शुरुआत की और इस बार यूपी बोर्ड में इंटरमीडिएट की परीक्षा में बैठी. उसने अपनी मेहनत के दम पर इस परीक्षा में 60.8% अंक हासिल कर फर्स्ट डिवीजन में परीक्षा पास किया है.

वकील बनना चाहती है खुशी

खुशी इस परीक्षा में मिले नंबरों से खुश है. उसने बताया कि वह और पढ़ना चाहती है और भविष्य में एक अच्छा वकील बनना चाहती है. उसने बताया कि पति अमर दुबे के एनकाउंटर के बाद वह करीब 30 महीने जेल में रही है. जेल से छूटने के बाद खुशी ने अपने जीवन को सफल बनाने के लिए पहला हथियार अपनी पढ़ाई को बनाया है. खुशी का कहना है कि वह अमर दुबे के साथ अपनी चार दिन की जिंदगी को भूलना चाहती हैं. अब वह सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती है.

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