देवबंद सीट: इकरा हसन ने छेड़ी सपा टिकट की जंग, मनोज चौधरी को बताया ‘प्रत्याशी’
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के एक बयान ने देवबंद सीट पर सियासी हलचल बढ़ा दी है. उन्होंने पूर्व विधायक मनोज चौधरी को 'हमारे प्रत्याशी' कहकर संबोधित किया, जिससे टिकट के लिए खींचतान तेज हो गई है. यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा नए समीकरण तलाश रही है
सहारनपुर की देवबंद सीट पर समाजवादी पार्टी से टिकट को लकेर सियासी हलचल तेज हो गई है. इसका कारण कैराना से सपा सांसद इकरा हसन हैं. उन्होंने 10 अप्रैल को गुर्जर संसद में भरे मंच से पूर्व विधायक मनोज चौधरी को “हमारे प्रत्याशी” कहकर संबोधित किया. इस बयान को लेकर अब सपा में देवबंद सीट पर टिकट के लिए खींचतान तेज हो गई है.
सांसद इकरा हसन के इस बयान का 16 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इकरा हसन द्वारा मनोज चौधरी को आगे बढ़ाना एक रणनीतिक संकेत माना जा रहा है. मनोज चौधरी गुर्जर समाज से आते हैं और क्षेत्र में उनका प्रभाव भी माना जाता है. वह बसपा से विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में उनका काफी दबदबा भी माना जाता है.
देवबंद सीट का सामाजिक समीकरण काफी जटिल
देवबंद विधानसभा सीट का सामाजिक समीकरण काफी जटिल और बहुस्तरीय है. यहां मुस्लिम और दलित वोटरों के साथ-साथ गुर्जर समाज की भी अहम भूमिका मानी जाती है. इसके अलावा यह सीट राजपूत, ब्राह्मण और त्यागी बाहुल्य इलाकों के प्रभाव में भी है, जो चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं. यहां संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होती है.
सांसद इकरा हसन का बयान ऐसे समय आया है जब सपा लगातार दो चुनाव हार चुकी है और नए समीकरण तलाश रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देवबंद सीट पर जीत के लिए सपा को ऐसा उम्मीदवार चुनना होगा जो सिर्फ एक वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि मुस्लिम, दलित, गुर्जर के साथ-साथ राजपूत, ब्राह्मण और त्यागी मतदाताओं को भी साध सके.
मुस्लिम चेहरा, स्थायी वोट बैंक; माविया अली भी रेस में
ऐसे में मनोज चौधरी का नाम एक संतुलित समीकरण के तौर पर उभरता नजर आ रहा है, लेकिन यह पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा. मनोज चौधरी के अलावा पूर्व विधायक माविया अली और कार्तिकेय राणा भी इस दौड़ में एक अहम नाम हैं. माविया अली की बात करें तो वह क्षेत्र में एक बड़े मुस्लिम चेहरा हैं और उनका अपना एक स्थायी वोट बैंक है.
पूर्व विधायक माविया अली ने 2016 में कांग्रेस के टिकट पर उपचुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की थी. हालांकि 2017 में सपा के टिकट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद वह लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी दावेदारी बनाए हुए हैं. उन्होंने 2016 में उपचुनाव में सपा प्रत्याशी कार्तिकेय राणा की मां को हराया था.
कार्तिकेय भी टिकट के दावेदार, इकरा हसन ने छेड़ी जंग
वहीं, कार्तिकेय राणा भी दावेदारों में से एक हैं. वह 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. कार्तिकेय राणा, सपा सरकार में मंत्री रहे राजेन्द्र सिंह राणा के बेटे हैं, और उनके परिवार का क्षेत्र में अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है. हालांकि लगातार हार और बदलते समीकरण उनकी राह को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं.
हालांकि, इकरा हसन का यह बयान अभी आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे इतना जरूर साफ हो गया है कि सपा के भीतर टिकट को लेकर खींचतान शुरू हो चुकी है. पहले ही इमरान मसूद जैसे नेताओं के बयानों से पार्टी में अलग-अलग धड़े सक्रिय नजर आ रहे थे, और अब यह बयान उस अंदरूनी खींचतान को और उजागर कर रहा है.