सहारनपुर: थाने में गर्भवती महिला से गैंगरेप, 11 साल बाद दो पुलिसवालों को 20-20 साल की सजा

सहारनपुर में दो पुलिस अधिकारियों को 20-20 साल की सजा सुनाई गई है. यह फैसला 11 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में आया है. तत्कालीन थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक ने थाने में ढाई माह की गर्भवती महिला के साथ गैंगरेप का किया था.

दोषियों को ले जाती पुलिस

सहारनपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले करीब 11 साल पुराने गैंगरेप के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. देवबंद थाने में ढाई महीने की गर्भवती महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी और एक दरोगा को दोषी करार दिया है. अदालत ने दोनों को 20-20 साल के कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (त्वरित अदालत) प्रबोध कुमार वर्मा की अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक ब्रजमोहन यादव और उपनिरीक्षक वेगपाल सिंह को सजा सुनाई. पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राजीव तोमर ने शुक्रवार को इस फैसले की जानकारी दी. सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया.

पति से मिलने थाने पहुंची थी गर्भवती महिला

पुलिस के मुताबिक, अगस्त 2015 में महिला के पति को कथित तौर पर एक फर्जी मुकदमे में गिरफ्तार किया गया था. जानकारी मिलने पर महिला पति की रिहाई की गुहार लगाने थाने पहुंची. महिला ने आरोप लगाया कि तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजमोहन यादव, उप निरीक्षक वेगपाल सिंह और कुछ अन्य लोगों ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया.

महिला ने बताया कि उसके साथ मौजूद उसकी ननद ने जब इसका विरोध किया तो उसकी भी पिटाई की गई. पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार, घटना के समय महिला ढाई महीने की गर्भवती थी. पीड़िता ने 4 आरोपियों के खिलाफ देवबंद थाने और तत्कालीन SSP को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट का रुख किया.

मामले की जांच CBCID को भी सौंपी गई थी

वकील राजीव तोमर ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे. आरोपियों को तलब किए जाने के बाद मामला सत्र न्यायालय और फिर फास्ट ट्रैक अदालत में पहुंचा. वकील ने बताया कि मामले की जांच सीबीसीआईडी को भी सौंपी गई थी.

अधिवक्ता के अनुसार, एक आरोपी तत्कालीन चौकी प्रभारी ने मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का दावा किया था, जिसके कारण उसके खिलाफ मुकदमा नहीं चल सका. वहीं, चौथे आरोपी सिपाही की पहचान और तलाश नहीं हो पाने के कारण मुकदमा केवल ब्रजमोहन यादव और वेगपाल सिंह के खिलाफ ही हुआ.

उम्रकैद की सजा के लिए HC में करेंगे अपील

पुलिस ने बताया कि ब्रजमोहन यादव पदोन्नति के बाद पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) बने और बाद में सेवानिवृत्त हो गए. जबकि वेगपाल सिंह (58) निरीक्षक पद पर पदोन्नत हो गए और वर्तमान में दूसरे जिले में तैनात हैं. वहीं, पीड़ित ने कोर्ट के फैसले पर संतुष्ट है, लेकिन उनका कहना है कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिलना चाहिए था.

वहीं, करीब 11 साल तीन महीने बाद पीड़िता को अदालत से न्याय मिला और सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया. पीड़ित पक्ष के वकील राजीव तोमर ने बताया कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने के लिए वे हाई कोर्य में अपील करेंगे.

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