संभल पुलिस में हड़कंप, SP की गोपनीय जांच में 39 पुलिसकर्मी फंसे, सभी को किया गया लाइन हाजिर

संभल जिले में कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं. इनके खिलाफ पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने गोपनीय जांच के आदेश दिए थे. जांच में तकरीबन 39 पुलिसवाले दोषी पाए गए हैं. सभी पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है.

संभल पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई

संभल के पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई सामने आई है. पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई की ओर से कराई गई गोपनीय जांच में 39 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं.जांच के आधार पर सुल्तानगंज चौकी प्रभारी सुनील दिवाकर के साथ-साथ 11 हेड कांस्टेबल और 27 सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है.

बता दें कि इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं. ऐसे में एसपी ने इनके खिलाफ गोपनीय जांच के निर्देश दिए थे. जांच में लापरवाही और अनुशासनहीनता सामने आने के बाद यह सख्त कार्रवाई की गई है.
पुलिस अधीक्षक की इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है. इसे अनुशासन बनाए रखने के लिए बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है.

11 हेड कांस्टेबल को किया गया लाइन हाजिर

एसपी केके बिश्नोई ने सुल्तानगंज चौकी प्रभारी सुनील दिवाकर के साथ-साथ 11 हेड कांस्टेबल सन्नी कुमार, विकास, रामाधार, मनवीर, मल्टी चौहान, विकास अधिकारी, दिलशाद, सोमेश, योगेश तोमर, विपिन कुमार, अरूण कुमार को लाइन हाजिर कर दिया है.

26 सिपाहियों पर भी कार्रवाई

सिपाही चतर सिंह, बंटी कुमार, विशाल , योगेश कुमार, नितिन,कादिर चौधरी, पवन कुमार, मदन गोपाल, तनवीर, विराज, पुरन, अंजुल कुमार , गोपाल, रवि सैनी, राहुल कुमार, संजीव, हरेंद्र, प्रमोद गिल, विवेक त्यागी, आरिफ, शुलभ राठी, कासिम, अंकित कुमार, सचिन , गोविंदा, विष्णु चौधरी और शुभम आर्य को भी गोपनीय जांच में दोषी पाने पर पुलिस लाइन बुला लिया गया है.

एसओजी टीम को निलंबित कर दिया गया था

बता दें कि संभल पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई ने तीन दिन पहले पूरी एसओजी टीम को निलंबित कर दिया गया था. दरअसल, एसओजी टीम ने मुरादाबाद जिले के बिलारी निवासी एक कबाड़ी को पकड़ा था. उसके पास से मोबाइल प्लेट से निकली सिल्वर धातु बरामद होने की बात कही गई थी.

क्या था मामला?

एसओजी टीम पर आरोप लगा कि कबाड़ी को माल सहित पुलिस चौकी ले जाया गया. फिर उससे मारपीट की गई. इस दौरान एक स्थानीय कबाड़ी के माध्यम से रुपये लेकर उसे छोड़ दिया. बरामद धातु को अपने पास रख लिया. धातु छोड़ने के एवज में कबाड़ी से पैसे की मांग की. मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई निष्पक्ष जांच कराई. एसओजी टीम के दोषी पाए जाने पर पूरी टीम को निलंबित कर दिया गया.