न बैरियर ना गेटमैन… ट्रेन से उतरकर रस्सी बांधो, फिर ट्रेन चलाओ, संभल की खतरनाक रेलवे क्रॉसिंग
संभल बाईपास के हातिम सराय इलाके की रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है. यहां जैसे ही ट्रेन पहुंचती है तो उससे एक कर्मचारी उतरता है. रस्सी बांधता है और ट्रैफिक रोकता है. फिर सब सही होने पर ट्रेन को आगे बढ़ने का इशारा करता है. खुद भी ट्रेन में बैठकर चला जाता है.
संभल के हातिम सराय बाईपास के पास एक रेलवे क्रॉसिंग ऐसी है, जहां न तो कोई स्थाई गेटमैन तैनात है और न ही स्वचालित बैरियर की व्यवस्था है . हैरानी की बात यह है कि जब ट्रेन गुजरती है तो वह पहले यहां रुकती है. फिर उस ट्रेन एक कर्मचारी उतरता है. फिर बैरियर की जगह रस्सी बांधता है. उसके बाद ट्रेन चलाता है. यह खतरनाक व्यवस्था सालों से जारी है. इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
संभल बाईपास के हातिम सराय इलाके की रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है. जैसे ही ट्रेन इस क्रॉसिंग पर पहुंचती है. ट्रेन से एक कर्मचारी नीचे उतरता है. फिर रस्सी के सहारे सड़क के दोनों ओर रास्ता बंद करता है. इस दौरान सड़क पर चल रहे वाहनों को रोक दिया जाता है. कर्मचारी हाथ के इशारे से ट्रेन को रुकने का संकेत देता है. ट्रेन की रफ्तार धीमी हो जाती है. ट्रेन से उतरा कर्मचारी खुद फाटक की निगरानी करता है. ताकि कोई वाहन ट्रैक पर न आ सके.
ट्रेन गुजरने के साथ खतरे में पड़ जाती है लोगों की जान
जब कर्मचारी को यकीन हो जाता है कि रास्ता पूरी तरह साफ है, तब वह हाथ का संकेत देकर ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति देता है, फिर खुद ट्रेन में सवार हो जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय से इसी तरह चल रही है लेकिन यहां न तो कोई स्थायी गेटमैन है और न ही कोई स्वचालित बैरियर. ऐसे में हर गुजरती ट्रेन के साथ लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है.
रेलवे प्रशासन की ओर से नहीं आया कोई आधिकारिक बयान
फिलहाल इस पूरे मामले में रेलवे प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. स्थानीय लोगों का कहना है यहां कई सालों से यही व्यवस्था चल रही है. ट्रेन से कर्मचारी उतरकर रस्सी बांधता है और ट्रैफिक रोकता है. यहां कोई गेटमैन नहीं है. कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. हमने कई बार शिकायत भी की है लेकिन अभी तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई.
