संभल: आदेश के बाद भी पुलिसकर्मियों पर FIR नहीं, न्याय की आस में पीड़ित परिवार; HC जाने की तैयारी
संभल गोलीकांड मामले में अदालत ने ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. इसके बाद भी अब तक आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई. वहीं, अब पीड़ित परिवार हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है. आरोप है कि हिंसा के दौरान पुलिस की गोली से आलम घायल हुआ था.
संभल जिला के CJM कोर्ट ने ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR का आदेश दिया है, लेकिन अभी तक केस दर्ज नहीं हुआ है. आरोप है कि संभल हिंसा में आलम नाम के व्यक्ति को पुलिस की गोली लगी थी, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गए. वहीं, पीड़ित परिवार एक साल से न्याय की आस के बाद अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है.
संभल हिंसा मामले में पीड़ित परिवार की पीड़ा अब सामने आ रही है. 22 वर्षीय आलम की बहन रजिया का कहना है कि उसका भाई पहले से ही दिव्यांग है और तीन पहिया ठेले पर बिस्किट बेचकर परिवार का गुज़ारा करता था. संभल हिंसा की घटना में गोली लगने के बाद किसी तरह उसकी जान तो बच गई, लेकिन अब उसका शरीर कमजोर हो चुका है.
आलम को हिंसा के बीच पुलिस की 3 गोलियां लगी
संभल में रविवार, 24 नवंबर, 2024 को जामा मस्जिद के दूसरे सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी. इस दौरान भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. पीड़िता का कहना है कि उनके भाई को तीन गोलियां लगी थी और बमुश्किल उसकी जान बच सकी. दिव्यांग युवक उस समय बिस्किट बेचने निकला था.
रजिया बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है. पिता के साथ-साथ आलम भी घर की कमाई का सहारा था, लेकिन इलाज के चलते परिवार पर कर्ज तक चढ़ गया है. रजिया ने आरोप लगाया कि जब अधिकारियों ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की, तब मजबूर होकर उनके पिता को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. अब इंसाफ की उम्मीद है.
पुलिस पर धमकाने के आरोप, डर में जी रहा परिवार
पीड़ित परिवार का दावा है कि पिछले एक साल से वे लगातार डर के साए में जी रहे हैं. घर पर पुलिस के आने और धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं, जिसके चलते पिता और भाई घर छोड़ने को मजबूर हो गए. पूरे परिवार का कहना है कि वे मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं. FIR दर्ज नहीं हुई तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.