क्या सच में मणिकर्णिका घाट पर चला बुलडोजर? मंत्री से लेकर प्रशासन तक दे रहे सफाई
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है. विपक्ष ने मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि जिला प्रशासन और यूपी सरकार इसे भ्रामक प्रचार बता रहे हैं. जिला प्रशासन से लेकर यूपी सरकार के मंत्री तक इस मामले पर सफाई दे रहे हैं.
वाराणसी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट इन दिनों सुर्खियों में है. मणिकर्निका घाट पर टूटी प्रतिमाओं और मढ़ी के वीडियो ने यूपी सरकार और प्रशासन को सकते में डाल दिया है. विपक्ष ने घाट पर बुलडोजर चलाने और मंदिरों को तोड़ने का आरोप लगाया है. जबकि प्रशासन से लेकर मंत्री तक इसे भ्रामक बताते हुए लगातार सफाई देते फिर रहे हैं.
वाराणसी के डीएम, नगर आयुक्त से लेकर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री एके शर्मा से लेकर रविन्द्र जायसवाल तक परेशान हैं.
सभी एक सुर से यही बात दोहरा रहे हैं कि मणिकर्निका घाट की पौराणिकता जस की तस है, उसे छेड़ा नहीं गया है. विपक्ष लगातार झूठा नैरेटिव सेट कर रहा है. मंदिरों और मूर्तियों के टूटने की बात पूरी तरह भ्रामक है.
सरकार और प्रशासन की छवि ख़राब करने की कोशिश
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि वीडियो के जरिए सरकार और प्रशासन की छवि ख़राब करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने लिखा, ‘जिन लोगों के कई दशकों के शासनकाल में मणिकर्णिका घाट पर एक ईंट तक नहीं रखी गई, न ही बदली गई वो लोग यहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्य के संबंध में मीडिया में भ्रामक खबरें फैला रहे हैं.’
उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि इस घाट पर स्थित सभी पौराणिक मंदिरों का समुचित संरक्षण करते हुए घाट पर अंतिम संस्कार हेतु बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए और भविष्य की आवश्यकताओं के दृष्टिगत व्यवस्थाओं का विकास किया जा रहा है. वहीं, डीएम लोगों से भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न देने की अपील कर रहे हैं.
सभी कलाकृतियों एवं मूर्तियों को सुरक्षित रखा गया- DM
वाराणसी के डीएम ने भी एक बार फिर से ट्वीट किया कि, ‘पुनर्निर्माण क्षेत्र में एक मढ़ी और दीवारों पर स्थित कुछ कलाकृतियां भी थी, जो कार्य के दौरान प्रभावित हुई हैं. इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक एवं निराधार दावे प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. घाट पर मौजूद सभी कलाकृतियों एवं मूर्तियों को सुरक्षित रखा गया है.
उन्होंने बताया कि तथ्य यह है कि संस्कृति विभाग द्वारा सभी कलाकृतियों को विधिवत संरक्षित कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है. पुनर्निर्माण कार्य के बाद इन्हें पहले के जैसा स्वरूप में फिर से स्थापित किया जाएगा. जनसामान्य से आग्रह है कि भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करें.
श्री काशी विद्वत परिषद ने इस पर आपात बैठक बुलाई
वाराणसी के मेयर, नगर आयुक्त और शहर दक्षिणी के विधायक नीलकंठ तिवारी ने भी मणिकर्निका घाट का दौरा किया और विपक्ष पर झूठा प्रॉपगेंडा फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि घाट पर लोगों और श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ता जा रहा है. इसलिए यहां का विकास होना जरूरी है. परम्परा और विरासत को ध्यान में रख कर ही विकास कार्य कराया जाएगा.
इस पूरे मामले पर श्री काशी विद्वत परिषद ने एक आपात बैठक बुलाई और प्रशासन से उनका पक्ष रखने को कहा. परिषद के महामंत्री राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि कोई मंदिर और प्रतिमा नहीं टूटी है. मढ़ी का आंशिक भाग प्रभावित हुआ है लेकिन उसमें रखी मूर्ति और शिवलिंग सुरक्षित है.
विकास पौराणिक मान्यता के अनुरूप ही होना चाहिए
श्री काशी विद्वत परिषद ने प्रशासन से दो टूक कहा है कि मणिकर्निका घाट पौराणिक महत्व वाला घाट है. हालांकि वहां विकास कार्य होना चाहिए उससे परहेज नही है. लेकिन विकास पौराणिक मान्यता के अनुरूप ही होना चाहिए और एक-एक मूर्ति और मढ़ी सहित धार्मिक महत्व वाले प्रतीकों का संरक्षण करते हुए ही होना चाहिए.
