संतकबीरनगर DM-कमिश्नर के आदेश रद्द, हाई कोर्ट ने मदरसा गिराने के फैसले को बताया गैर-कानूनी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संतकबीरनगर में मदरसा ध्वस्तीकरण को अवैध करार दिया है. कोर्ट ने डीएम और बस्ती मंडलायुक्त के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि अधिकारियों ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर यह फैसला लिया. मदरसा कमेटी ने बिना नोटिस ध्वस्तीकरण का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की.
इलाहाबाद हाईकोर्ट से संतकबीरनगर के डीएम और बस्ती मंडलायुक्त को बड़ा झटका लगा है. अदालत ने ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसा ध्वस्तीकरण को अवैध करार दिया. साथ ही दोनों अधिकारियों के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि इन्होंने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर यह फैसला पारित किया, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है.
हाईकोर्ट में मदरसा कमेटी की तरफ से ध्वस्तीकरण को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई थी. याचिका में कमेटी ने बिना किसी नोटिस के मदरसा ध्वस्त किए जाने का आरोप लगाया था. हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए अधिकारियों के रवैए पर नाराजगी जताई. साथ ही कहा कि किसी भी जमीन को सरकारी घोषित करने का पावर सिर्फ एसडीएम के पास है.
जमीन को स्टेटलैंड बताने वाले डीएम के आदेश रद्द
बीती 25-26 अप्रैल को प्रशासन ने मदरसा ढहाने की कार्रवाई की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. वहीं, कोर्ट ने आज सुनवाई में 14 नवंबर 2025 को मदरसे की जमीन को स्टेटलैंड बताने वाले डीएम के आदेश और कमिश्नर बस्ती द्वारा निगरानी अपील खारिज करने के आदेश को भी रद्द कर दिया. यह मदरसा मौलाना शमसुल हुदा खान ने 2018 में बनवाया था.
खलीलाबाद गांव के रहने वाले अब्दुल हकीम ने 2024 में मदरसे के अवैध निर्माण की शिकायत एसडीएम कोर्ट में की थी. इसपर नवंबर, 2025 में एसडीएम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया. इसके बाद मदरसा कमेटी ने याचिका दाखिल की, जिसे खारिज कर दिया गया. फिर कमिश्नर ने ध्वस्तीकरण का रिमाइंडर नोटिस जारी किया था.
मदरसा विदेशी फंडिंग के आरोपों के कारण चर्चा में
इसके बाद प्रशासन ने 25 और 26 अप्रैल को ढहाने की कार्रवाई की थी. इस दौरान मदरसे की बाउंड्रीवॉल और 10 से अधिक पिलर तोड़े गए थे. हालाकिं, हाईकोर्ट ने मामले में याचिका पर सुनवाई करते हुए ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी थी. अब मदरसा कमेटी ध्वस्तीकरण पर मुआवजा और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है.
मौलाना शमशुल हुदा खान का यह मदरसा सरकारी जमीन पर बना होने और विदेशी फंडिंग के आरोपों के कारण चर्चा में था. मौलाना शमशुल साल 2007 में भारत छोड़कर ब्रिटेन फरार हो गए थे. मौलाना पर पाकिस्तानी संगठन से जुड़े होने और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं. इस पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) और ईडी द्वारा की जा रही है.
