सिद्धार्थनगर: जमीनी विवाद में युवक की मौत के बाद परिजनों ने काटा बवाल, 7 घंटे तक चक्काजाम; SO निलंबित

सिद्धार्थनगर के लोटन में जमीनी विवाद में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद बवाल हो गया. आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने चक्काजाम कर प्रदर्शन किया. सात घंटे चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने 24 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया. साथ ही एसओ पर गाज गिरी है.

लोटन हिंसा: जमीनी झगड़े में युवक की हत्या से बवाल Image Credit:

सिद्धार्थनगर के लोटन में तीन दिन पहले जमीनी विवाद में एक युवक गंभीर रुप से घायल हो गया था, जिसकी गुरुवार को इलाज के दौरान मौत हो गई. इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया, और उन लोगों ने कस्बे के मेन चौराहे पर शव रखकर चक्का जाम कर दिया. वहीं, धरना प्रदर्शन के दौरान लापरवाही पर एसओ को निलंबित कर दिया गया.

जानकारी के मुताबिक, कोल्हुआ निवासी संदीप यादव पुत्र भोला का गदहमरवा गांव के राममिलन से तीन दिन पहले जमीन को लेकर मारपीट हुई, जिसमें उसके सिर में गंभीर चोंट लगी थी. वहीं, युवक की मौत के बाद करीब सात घंटे तक चक्काजाम रहा. पुलिस ने 24 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी के आश्वासन पर दोपहर बाद जाम समाप्त कराया गया.

धरना स्थल पर पहुंचे SO को भीड़ ने दौड़ा लिया

आक्रोशित लोगों ने कस्बे के मेन चौराहे पर गुरुवार को शव रखकर सड़क जाम कर दिया गया. सुबह 7 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक चले जाम से स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज और नौकरीपेशा लोग सबसे ज्यादा परेशान हुए. एम्बुलेंस को भी निकलने में दिक्कत हुई. वहीं, लोटन-कोल्हुई , लोटन-मोहाना और सोहास मार्ग पर वाहनों की लम्बी कतार लग गई थी.

पुलिस की कार्यशैली से आक्रोशित होकर लोग धरना प्रदर्शन कर रहे थे. चक्का जाम समाप्त कराने की वार्ता करने पहुंचे तत्कालीन एसओ दिनेश कुमार सरोज को बेकाबू भीड़ ने दौड़ा लिया. आक्रोशित भीड़ को देखकर वह हमराहियों के साथ थाने परिसर भाग गए. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर वह भागे न होते तो आज भीड़ एसओ पर टूट पड़ती.

पुलिस समय पर सख्ती दिखाती तो संदीप जिंदा होता

ग्रामीणों का आरोप है कि अगर पुलिस समय रहते सख्ती दिखाती तो आज संदीप जिंदा होता. परिजनों ने पुलिस पर समय से कार्रवाई न करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि जमीनी विवाद करीब चार माह से चल रहा था. पुलिस ने दलालों के माध्यम से समझौता कराने का प्रयास किया, अगर सही कार्रवाई की होती तो शायद यह घटना नहीं घटती.

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सिर्फ औपचारिकता पूरी की, सिपाही तैनात तो कर दिए, लेकिन न पैमाइश हुई, न आरोपियों पर दबिश. विपक्षी खुलेआम घूमते रहे. वहीं, एसपी डा. अभिषेक महाजन ने पुलिस की लापरवाही को लेकर त्कालीन एसओ दिनेश कुमार सरोज को निलंबित कर नए थानेदार हरिओम कुशवाहा को थाने की कमान सौंपी है.

24 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन- पुलिस

एसपी के निर्देश पर नवागत थानाध्यक्ष ने कमान संभालने के बाद मुकदमा दर्ज कर परिजनों को समझा बुझाकर धरना समाप्त कराया. साथ ही 24 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है. मृतक के चाचा बबलू यादव की तहरीर पर पुलिस ने आठ नामजद और पांच अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, अब संदीप की मौत के बाद धारा 105 बढ़ाया गया.

मामले में गदहमरवा निवासी राममिलन, रामलखन, रामअवध व रामअवध की बहन पुत्र सुखलाल, कोल्हुआ निवासी भरत पुत्र प्रह्लाद, रामजीत पुत्र काशी, नवीन पुत्र कन्हैया, सोनी लोधी, श्यामसुंदर लोधी, नरकटहा निवासी सीताराम यादव,नेतवर निवासी मूसे सिंह, करुआवल कला निवासी श्रवण कुमार पाण्डेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई है.

Follow Us