अब नए बर्थ सर्टिफिकेट से आधार में दर्ज जन्मतिथि को नहीं कर सकेंगे चेंज, UIDAI का सख्त फैसला

अब तक आधार में खुद से एक बार से ज्यादा जन्मतिथि नहीं बदली जा सकती. इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालय जाना पड़ता है. लेकिन लोग नया जन्म प्रमाणपत्र बनवाकर इस नियम को चकमा दे देते थे. अब UIDAI ने सख्त फैसला किया है. नए नियम के मुताबिक अब अगर कोई नई संख्या वाला जन्म प्रमाणपत्र जन्मतिथि में बदलाव के लिए लगाएगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा.

आधार अपडेट

यूपी में अब आधार कार्ड में डेट ऑफ बर्थ बदलवाने के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इससे लोगों के लिए नौकरी या फिर खेल के मौकों के लिए उम्र में हेरफेर करना मुश्किल हो जाएगा. यूआईडीएआई ने सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है. अब जन्मतिथि बदलने के लिए पुराने जन्म प्रमाणपत्र में संशोधन कराना जरूरी होगा. अगर कोई नया प्रमाणपत्र बनवाकर अलग जन्म पंजीकरण संख्या वाला दस्तावेज जमा करता है तो उसका आधार अपडेट रद्द कर दिया जाएगा.

नई पंजीकरण संख्या वाला जन्म प्रमाणपत्र मान्य नहीं होगा

अक्सर खबरें आती हैं कि उम्र सीमा का फायदा उठाने के लिए खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने या फिर हाईस्कूल की परीक्षा दोबारा देने के लिए लोग आधार में दर्ज जन्म तिथि में बदलाव कराते हैं. इसके लिए वे पहले वाला जन्म प्रमाणपत्र निरस्त करवाकर नया बनवा लेते थे. अलग-अलग प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर आसानी से बदलाव कर लिया जाता था. लेकिन अब यह खेल बंद हो जाएगा. नियम के मुताबिक, जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज विशेष जन्म पंजीकरण संख्या Birth Registration Number पहले वाली ही रखनी होगी.

80 फीसदी संशोधन जन्मतिथि को लेकर ही होते हैं

ऐसे में अगर कोई नई संख्या वाला प्रमाणपत्र लगाएगा, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा. आंकड़ों के अनुसार आधार केंद्रों पर करीब 80 फीसदी संशोधन जन्मतिथि को लेकर ही होते हैं. पहले से ही एक नियम था कि खुद से एक बार से ज्यादा जन्मतिथि नहीं बदली जा सकती. इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालय जाना पड़ता है. लेकिन लोग नया जन्म प्रमाणपत्र बनवाकर इस नियम को चकमा दे देते थे. अब यूआईडीएआई ने इसे पूरी तरह रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. ऐसे में अब जन्म तिथि में हेरफेर पर लगाम लग जाएगी.

पकड़े जाने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

यह बदलाव उन युवाओं, खिलाड़ियों और नौकरी चाहने वालों पर सीधा असर डालेगा, जो उम्र में हेरफेर कर फायदा उठाते थे. उदाहरण के लिए, कुछ खिलाड़ी कम उम्र दिखाकर खेलों में हिस्सा लेते थे. वहीं, कई छात्र हाईस्कूल परीक्षा दोबारा देने के लिए जन्मतिथि बदलते थे. नया नियम लागू होने के बाद ऐसे मामलों में पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. यह बदलाव आधार केंद्रों पर आने वाले आवेदकों की संख्या को प्रभावित कर सकता है, लेकिन लंबे समय में फर्जी दस्तावेजों पर अंकुश लगाएगा.

हेरफेर रुकेगा और आधार डेटाबेस में सटीकता आएगी

यूआईडीएआई लखनऊ के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह ने इस बदलाव की पुष्टि करते हुए कहा जन्मतिथि में बदलाव करने को लेकर नियम बदला गया है. इसके लिए पहले दिए गए जन्म प्रमाणपत्र में ही संशोधन होना अनिवार्य होगा. अगर अलग जन्म पंजीकरण संख्या का जन्म प्रमाणपत्र होगा तो वह मान्य नहीं होगा. उन्होंने जोर दिया कि यह कदम हेरफेर रोकने और आधार डेटाबेस को सटीक बनाने के लिए उठाया गया है. फिलहाल, सभी जिला कार्यालयों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए