गंगा में नॉनवेज फेंकने से आहत हो सकती हैं हिंदुओं की भावनाएं… वाराणसी इफ्तार पार्टी मामले पर हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंगा नदी में बचा हुआ मांसाहारी भोजन फेंकने के मामले में इफ्तार पार्टी के पांच आरोपियों को जमानत दी है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह कृत्य हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है. वहीं, आरोपियों ने भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की कसम खाई.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर आयोजित इफ्तार पार्टी मामले में बड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि गंगा में बचा हुआ मांसाहारी भोजन फेंकने से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं. साथ ही पांच आरोपियों को अपने कृत्य पर खेद व्यक्त करे और उनके परिवारों द्वारा समाज को हुई पीड़ा पर अफसोस जताते पर जमानत दी.
अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों, आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड न होने, अब तक जेल में बिताई गई अवधि और खेद व्यक्त किए जाने के मद्देनजर प्रथम दृष्टया जमानत दी जानी चाहिए. साथ ही पांच आरोपियों मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल आफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस को जमानत दी.
15 मई को तीन आरोपियों को मिली थी जमानत
मामला मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी से जुड़ा है. अदालत ने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय के सदस्यों पर उक्त इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहारी भोजन किए जाने और बचा हुआ खाना गंगा नदी में फेंके जाने का आरोप है. अदालत का मानना है कि यह कृत्य हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला माना जा सकता है.’
17 मार्च 2026 से जेल में बंद आरोपियों ने अपने कृत्य पर खेद जताते हुए भविष्य में ऐसा कार्य दोबारा नहीं करने का आश्वासन दिया है. इसी मामले में जस्टिस जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने 15 मई को तीन अन्य आरोपियों मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को भी जमानत दे दी थी. इससे पहले अदलात ने इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना बताया था.
15 मार्च की घटना, 16 को हुआ था मुकदमा दर्ज
वाराणसी में भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर मामले में 16 मार्च मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें कहा गया था कि इस घटना से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने 15 मार्च को गंगा में नाव पर रमजान का रोजा खोला, मांसाहारी भोजन किया और बचा हुआ भोजन नदी में फेंक दिया था.
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिनमें पूजा स्थल को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाएं भड़काने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं. वाराणसी की एक सत्र अदालत ने एक अप्रैल को आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज करते हुए इस कृत्य को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से किया बताया था.