गौरा ने रचाई मेंहदी, ससुराल से आई थाल; महाशिवरात्रि पर दूल्हा बने बाबा विश्वनाथ
महाशिवरात्रि पर काशी में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के विवाह का भव्य उत्सव मनाया जा रहा है. मेहंदी की रस्म पूरी हुई, ससुराल से थाल भी आया. बाबा दूल्हा बने हैं और माता पार्वती मिलन का इंतजार कर रही हैं. भक्त उत्साहित हैं और सृष्टि के पहले विवाह समारोह में शामिल होने के लिए उमड़ पड़े हैं.
आज काशी में जश्न है. चहुं ओर हर-हर महादेव की गूंज है. बाबा विश्वनाथ भी आज सुबह से विधिवत तैयार होकर दूल्हा बने बैठे हैं. उनके इस स्वरुप के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है. सुबह नौ बजे तक ही 4 लाख से अधिक भक्तों ने बाबा के दर्शन कर लिए थे. दरअसल आज बाबा का विवाह है. इसलिए बाबा के साथ ही उनके भक्त भी उत्साहित है.
सृष्टि के इस पहले विवाह समारोह को देखने के लिए भक्तों में होड़ मची है. वहीं महंत आवास में माता पार्वती भी आकर्षक श्रृंगार कर बाबा से मिलन का इंतजार कर रही हैं. टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास में शनिवार को माता पार्वती और बाबा के हल्दी-मेंहदी का कार्यक्रम हुआ. परंपरा के मुताबिक इस अवसर पर मेहंदी की थाल बाबा के ससुराल सारंगनाथ भेजी गई, जहां ससुरालीजनों ने हल्दी अर्पित कर मेहंदी ग्रहण की.

इस मांगलिक परंपरा के साथ ही पूरी काशी बाबा और माता गौरा के सगुन की खुशबू से सराबोर हो गई. मान्यता है कि बाबा और गौरा का विवाह इस ब्रह्माण्ड का पहला विवाह है, जिसका जिक्र सभी पुराणों के अलावा कई उत्तर पौराणिक ग्रंथों में मिलता है.

काशी विश्वनाथ गंगे माता पार्वती संगे
बाबा विश्वनाथ माता गौरा के संग अपने मनमोहक रूप में गर्भ गृह से प्रसन्न चित्त होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे हैं. बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती के वैवाहिक वर्षगांठ जिसको महाशिवरात्रि कहते हैं, काशी में ये लोकाचार और लोक पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस मौके पर बाबा विश्वनाथ के साले कहे जाने वाले बाबा सारंगनाथ के घर पर निभाया जाता है. बाबा सारंगनाथ को मां गौरा का भाई कहा जाता है. अब सबकी निगाहें महादेव की सगुन बारात पर टिकी हैं.
भव्य निकलेगी बारात
काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ दंड और छत्र के साथ बारात लेकर निकलेंगे. इसमें हजारों की तादात में श्रद्धालु शामिल होंगे. काशी की गलियों से जब बाबा की बरात निकलेगी, पूरा शहर बाबा के जयकारों से गूंज उठेगा. यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि इसमें सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन होगा. श्रद्धालुओं का कहना है कि यह बरात केवल प्रतीकात्मक यात्रा नहीं, बल्कि लोकजीवन का उत्सव है. हर घर में बारात की आरती उतारी जाएगी, हर द्वार पर फूल बरसाए जाएंगे और काशी एक बार फिर विवाहोत्सव के रंग में रंग जाएगी.
