एक साल बाद विश्वनाथ मंदिर जा रहे PM मोदी, महिलाओं संग करेंगे नारी वंदन; क्यों हो रही चर्चा?

प्रधानमंत्री मोदी 28-29 अप्रैल को वाराणसी में हैं. वे नारी वंदन सम्मेलन में 50 हजार महिलाओं से मिलेंगे और एक साल बाद काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे. उनके इस दौरे को बंगाल चुनाव से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि वाराणसी में बड़ी संख्या में बंगाली मतदाता हैं. कांग्रेस इसे बंगाल में हो रहे मतदान को प्रभावित करने की कोशिश बता रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आ रहे हैं. यहां वह 50 हजार महिलाओं के साथ नारी वंदन सम्मेलन में शिरकत करेंगे. फिर अगले दिन पीएम मोदी बीएलडब्लू गेस्ट हाउस से सुबह 7:30 बजे निकलकर विश्वनाथ मंदिर जाएंगे. 12 किमी का यह सफर करीब एक घंटे में पूरा होगा. इस बीच रास्ते में बनारस रेलवे स्टेशन, पुलिस लाइन चौराहा, लहुराबीर चौराहा, मैदागिन चौराहा और विश्वनाथ मंदिर के पास उनका भव्य स्वागत होगा. इसके लिए वाराणसी बीजेपी ने पूरी तैयारी कर ली है.

बीजेपी के काशी क्षेत्राध्यक्ष दिलीप पटेल के मुताबिक पीएम 29 अप्रैल की सुबह 7:30 बजे बीएलडब्ल्यू से मंडुवाडीह, लहरतारा होकर पुलिस लाइन चौराहा होते हुए लहुराबीर से मैदागिन चौराहा होकर विश्वनाथ मंदिर तक जाएंगे. उनका यह सफर करीब एक घंटे का होगा, इस दौरान पांच स्थानों पर प्रधानमंत्री का स्वागत होगा. इन पांचों स्थानों पर 3 हजार से अधिक लोग मौजूद रहेंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस सफर को ना तो रोड शो कहा जा सकता है और ना ही इसे बंगाल चुनाव से जोड़ा जाना चाहिए.

बंगाल चुनाव से क्या कनेक्शन?

बनारस को मिनी बंगाल भी कहा जाता है. चूंकि बंगाल में 29 अप्रैल को ही वोटिंग भी है, इसलिए बनारस में प्रधानमंत्री के इस रोड शो को बंगाल चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के मुताबिक यह बंगाल में हो रहे दूसरे फेज़ के मतदान को प्रभावित करने की कोशिश है. जानबूझकर इस रोड शो का इस तरह से रूट तैयार किया गया है कि शहर की तीनों विधानसभा सीटें बनारस उत्तरी, बनारस दक्षिणी और कैंट विधानसभा कवर हो जाए. इसके बाद मंदिर में भी दर्शन पूजन का लाइव प्रसारण कर बंगाल में नरेटिव सेट करने की कोशिश होगी.

बनारस को क्यों कहा जाता है मिनी बंगाल?

राजनैतिक विश्लेषक प्रोफेसर दीपक मलिक के मुताबिक देश में चुनाव को नब्ज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहतर शायद ही कोई समझता हो. उत्तरप्रदेश के वाराणसी में करीब सत्तर हज़ार बंग समाज के लोग रहते हैं. इनमें करीब 50 हज़ार बंगाली मतदाता हैं. इसीलिए इस शहर को मिनी बंगाल भी कहा जाता है. एक ज़माने में सिर्फ बंगाली मतदाताओं के सहारे बनारस साउथ की सीट निकलती थी. श्याम देव रॉय चौधरी, ज्योत्सना श्रीवास्तव और देवव्रत मजूमदार जैसे बंग समाज से आने वाले नेताओं का वाराणसी में बड़ा प्रभाव रहा है. रुस्तम सैंटिन जो कम्युनिस्ट नेता हुआ करते थे वो भी बंगाली समाज के ही सहारे चुनाव जीता करते थे.

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