PM मोदी के गढ़ में सपा-कांग्रेस का बड़ा दांव! BBP समीकरण से 4 सीटें जीतने की रणनीति
सपा-कांग्रेस वाराणसी में ब्राह्मण-भूमिहार-पटेल (BBP) वोटरों को एकजुट कर BJP को चुनौती दे रही है. अखिलेश यादव 31 अक्टूबर को वाराणसी में इस रणनीति पर मुहर लगाएंगे. अजय राय और सुरेंद्र पटेल इस 'BBP इक्वेशन' को 2027 में सत्ता परिवर्तन का आधार मान रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी रणनीति तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन बीजेपी को चुनौती देने के लिए BBP यानी ब्राह्मण-भूमिहार-पटेल समीकरण साधने की कोशिश में जुटा है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र पटेल इस ‘BBP इक्वेशन’ को 2027 में सत्ता परिवर्तन का आधार मान रहे हैं.
सपा-कांग्रेस गठबंधन की रणनीति ब्राह्मण, भूमिहार और पटेल मतदाताओं को एकजुट करने के साथ यादव और मुस्लिम वोटों का समर्थन भी हासिल करना है. इस रणनीति के तहत वाराणसी के आठ सीटों में से चार पर सेंध लगाने की तैयारी में है. ये चार सीटें वाराणसी की पिंडरा, सेवापुरी, रोहनिया और कैंट सीट है, जिसको गठबंधन हथियाने की कोशिश में है.
लोकसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न पर भरोसा
कांग्रेस नेता अजय राय ने टीवी 9 डिजिटल को बातचीत में ये बताया की इस लोकसभा में हमने पीएम की जीत का अन्तर बहुत कम कर दिया. इस बार हमारी कोशिश बनारस में बीजेपी को बड़ा झटका देने का है. अजय राय ने कहा कि लोकसभा चुनाव के पैटर्न पर भूमिहार और पटेल वोटरों के साथ ब्राह्मण समाज को भी साथ में लेकर सत्ता परिवर्तन करने जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे इस प्रयास में वो सभी समाज जो इस सरकार से खुश नही हैं उनका भी सहयोग मिल रहा है. अजय राय ने कहा की 2017, 2019 और 2022 में वोटिंग पैटर्न के आधार पर ये देखा गया है की भूमिहार और ब्राह्मण दोनों एक साथ एक जगह वोट करते हैं. 2027 में भी यही ट्रेंड देखने को मिलेगा. ब्राह्मण और भूमिहार दोनों गठबंधन को वोट देने जा रहे हैं.
ये कॉम्बिनेशन बनारस में भारी पड़ने वाला है- सुरेंद्र पटेल
सपा नेता सुरेंद्र पटेल ने कहा की इस सरकार से हर समाज और जाति की नाराजगी है. लेकिन पटेल, भूमिहार और ब्राह्मण समाज के लोगों में ये गुस्सा ज़्यादा है. यादव और मुस्लिम तो वैसे भी गठबंधन के ट्रेडीशनल वोटर हैं. ये कॉम्बिनेशन बनारस में बीजेपी को भारी पड़ने वाला है. सेवापुरी, रोहनिया और पिंडरा तो हम जीतने जा ही रहे हैं. कैंट, शिवपुर और अजगरा में भी इसका असर दिखाई देगा.
राजनैतिक विश्लेषक इस समीकरण पर क्या कहते हैं?
वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषक विजय नारायण कहते हैं की लोकसभा चुनाव के परिणाम बीजेपी के प्रतिकूल रहे थे और उसके लिए ओबीसी के पटेल और मौर्या जबकि सवर्णों में भूमिहार वोटरों की महती भूमिका रही थी. भूमिहार, ब्राह्मण और पटेल वोटरों का कॉम्बिनेशन अगर सपा-कांग्रेस बना लेती है तो इसका मतलब है की रोहनिया में एक लाख पटेल, 50 हज़ार ब्राह्मण और भूमिहार हैं. यादव और मुस्लिम के साथ ये करीब सवा दो लाख वोट तक पहुंच जाएंगे.
जबकि सेवापुरी में सवा लाख पटेल 50 हजार ब्राह्मण और भूमिहार के साथ मुस्लिम और यादव की सहायता से सवा दो लाख वोट तक पहुंच जाएंगे. पिंडरा में ये कॉम्बिनेशन सत्तर हज़ार पटेल, 80 हज़ार ब्राह्मण और भूमिहार मिलकर 50 हज़ार मुस्लिम और यादव के सहयोग से विनिंग कॉम्बिनेशन तैयार कर लेंगे.
कैंट में हालांकि पटेल दस हज़ार के आसपास ही हैं. कैंट में हालांकि पटेल दस हज़ार के आसपास ही हैं. लेकिन ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम के सहयोग से ये दो लाख वोट के आसपास पहुंच जाएंगे. दलित वोटर्स से अगर थोड़ा बहुत सहारा इनको मिल जाता है और इसके अलावे अगर छोटे छोटे चंक/पॉकेट में थोड़ा बहुत भी ये सेंध लगा लेते हैं तो आठ में से चार सीटों पर परिणाम बदल सकता है.
