हार का डर या 22 की कसक! 27 में अतरौलिया से लड़ना चाहते हैं ओमप्रकाश, किसे बताया अखिलेश का अहंकार?

ओमप्रकाश राजभर 2027 के यूपी चुनावों में अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने को लेकर उत्सुक हैं, जिसे वे अखिलेश यादव के अहंकार के कारण 2022 में नहीं लड़ पाए थे. उनका लक्ष्य आजमगढ़ की 10 सीटों पर फोकस करते हुए अखिलेश के 'अहंकार' को तोड़ना है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक राजभर की व्यक्तिगत क्षमताओं पर सवाल उठा रहे हैं, खासकर मुख्तार अंसारी के समर्थन के अभाव और सपा द्वारा राजभर नेताओं को साधने के बाद.

ओमप्रकाश राजभर की रणनीति

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी सुभासपा ने कमर कस ली है. सुभासपा चीफ ओमप्रकाश राजभर प्रदेश में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं. इसी क्रम में उनकी आठवीं सामाजिक समरसता रैली वाराणसी के पिंडरा में होने जा रही है. इस रैली से पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़े दावे किए हैं. कहा कि उनकी तैयारी प्रदेश के 63 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की है, लेकिन इसमें मुख्य फोकस आजमगढ़ की 10 विधानसभा सीटें हैं.

इन 10 सीटों में भी अतरौलिया बेहद खास है. ओमप्रकाश ने कहा कि वह 2022 के विधानसभा चुनावों में भी इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. उस समय वह सपा गठबंधन में थे और अपने अहंकार में अखिलेश यादव ने यह सीट उन्हें नहीं दी थी. अतरौलिया की सीट मांगने पर अखिलेश यादव ने कहा था कि ‘अतरौलिया में तुम्हारा क्या है? क्यूं लड़ोगे तुम अतरौलिया?’ आखिर में वह जहूराबाद से चुनाव में उतरे और जीते भी. तभी से यह कसक है कि वह अतरौलिया लड़ें.

अखिलेश का अहंकार तोड़ना है मकसद

उन्होंने कहा कि इस बार वह हर हाल में अतरौलिया लड़ेंगे. वह अतरौलिया ही नहीं, आजमगढ़ के सभी दस सीटों पर पूरी जी जान से जुट गए है. उनका मकसद अखिलेश यादव के अहंकार को तोड़ना है और तोड़कर रहेंगे. उन्होंने कहा कि दिल्ली से जो सीटें मिलेंगी चुनाव तो वह उन्हीं सीटों पर लड़ेंगे. लेकिन उनकी हार्दिक इच्छा है कि आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी और अखिलेश का घमंड टूटे. यहां की सभी सीटें एनडीए के खाते में जाएं.

फिर दी ये सफाई

अपने बयान के बाद ओमप्रकाश ने सफाई भी दी. कहा कि ‘मैं ये स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अतरौलिया सीट अपने लिए नहीं मांग रहा, मैं तो जहूराबाद से ही लडूंगा, लेकिन इस सीट पर मैं अपनी पार्टी के किसी नेता को लड़ाना चाहता हूं’. बता दें कि आजमगढ़ की अतरौलिया और दीदारगंज सीट पर ओमप्रकाश लगातार दावे कर रहे हैं. जबकि अभी तक सीटों के तालमेल को लेकर एनडीए की एक भी बैठक नहीं हुई है. उन्होंने अपने सामाजिक समरसता रैली का आगाज़ भी आजमगढ़ से ही किया था. बीते एक वर्षों में वह सबसे ज्यादा अतरौलिया और दीदारगंज में ही एक्टिव नजर आए.

कहीं हार का डर तो नहीं सता रहा?

वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार का कहना है कि ओमप्रकाश राजभर अपने आप में इतने सक्षम नहीं हैं कि वो अकेले दम पर चुनाव जीत सकें. 2022 में वह सपा गठबंधन में थे और उन्हें मुख्तार अंसारी का सपोर्ट था. इसका फायदा जहूराबाद के चुनाव में मिला और वह जीत गए. इस बार परिस्थिति बदली हुई है. मुख्तार का परिवार इनके विरोध में है. क्षेत्र में इन्होंने कुछ काम किया नहीं है, ऊपर से समाजवादी पार्टी ने राजभर नेताओं को अपनी पार्टी में महत्वपूर्ण पद देना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में सीमा राजभर को सपा ने महिला सभा का अध्यक्ष बनाया है. ऐसे में ओमप्रकाश राजभर के सामने जहूराबाद छोड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है.

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