वाराणसी में संतों ने किया शंकराचार्य का विरोध, बोले- टूल की तरह काम कर रहे हैं अविमुक्तेश्वरानंद
वाराणसी के पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालक देवाचार्य की अध्यक्षता में हुए एक बैठक वैष्णव विरक्ति संत समाज और रामानंद सम्प्रदाय के कई संत शामिल हुए. इन संतों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रस्ताव पास किया. उनपर इंडिया गठबंधन के लिए टूल की तरह काम करने का आरोप लगाया.
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज यानी 11 मार्च से लखनऊ में गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शंखनाद कर रहे हैं. लेकिन उससे पहले वाराणसी में कई संतों ने उनके खिलाफ खिलाफ शंखनाद कर दिया. वाराणसी के पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालक देवाचार्य की अध्यक्षता में हुए एक बैठक वैष्णव विरक्ति संत समाज और रामानंद सम्प्रदाय के कई संत शामिल हुए. इस दौरान इन संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पास किया.
इंडिया गठबंधन के लिए टूल की तरह काम कर रहे अविमुक्तेश्वरानंद
पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालक देवाचार्य ने तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जिस उत्तरप्रदेश में गाएं सबसे अधिक सुरक्षित हैं वहां गौ रक्षा के नाम पर अविमुक्तेश्वरानंद राजनीति कर रहे हैं. 2027 से पहले इंडिया गठबंधन के पक्ष में वो एक टूल की तरह से काम कर रहे हैं, ताकि उन्हें फायदा हो.
अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया योगी सरकार को बदनाम करने का आरोप
बालक देवाचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर योगी सरकार को बदनाम करने और सनातन को भी पंथ और सम्प्रदाय में भी बांटने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा रामानंद सम्प्रदाय पर उनकी टिप्पणी भी बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने दावा कि कोई भी सम्प्रदाय और पंथ अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में नहीं है. ये बर्दाश्त नही किया जाएगा. इसलिए हमलोगों ने ये बैठक बुलाकर अविमुक्तेश्वरानंद के ख़िलाफ प्रस्ताव पारित किया है.
दरअसल, जगतगुरू रामभद्राचार्य ने कुछ दिनों पहले बयान दिया था, कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अगर कुछ बयान देना चाहते थे, या कुछ कहना चाहते थे, तो इसको लेकर उन्हें रामानंद संप्रदाय से सुझाव ले लेना चाहिए. इस प्रतिक्रिया देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि रामानंद संप्रदाय को सुझाव देने या उन्हें कुछ कहने का हक नहीं है.
मौनी अमावस्या पर प्रयागराज प्रशासन से हो गया था विवाद
18 जनवरी को माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान के दिन अविमुक्तेश्वरानंद और प्रयागराज प्रशासन का विवाद हो गया था. इस दौरान प्रयागराज प्रशासन पर शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई करने का भी आरोप लगा था. इसके बाद से ही शंकराचार्य और योगी सरकार के बीच तल्खियां बढ़ गईं. आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ मारपीट के विरोध में अनशन पर भी बैठे थे.
नाबालिग बटुकों से यौन उत्पीड़न का लगाया गया आरोप
उधर जगतगुरू रामभद्राचार्य के शिष्य कहे जाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दो नाबालिग बटुकों का यौन शोषण करने का आरोप लगाया. प्रयागराज एडीजे कोर्ट में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की अर्जी दाखिल की. थी. कोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंदगिरी पर केस भी दर्ज कराया गया था. इस मामले में पुलिस की जांच जारी है. मेडिकल रिपोर्ट में बटुकों के साथ यौन शोषण की भी पृष्टि हुई है.