साबरमती और गोमती की तर्ज पर काशी में बनेगा वरुणा रिवर फ्रंट, इतना आएगा खर्च

काशी में साबरमती की तर्ज पर 260.61 करोड़ की लागत से वरुणा रिवर फ्रंट बनेगा. ONGC अपने CSR फंड से इस प्रोजेक्ट को वित्त पोषित करेगा. यह परियोजना वाराणसी के शहरी सौंदर्यीकरण, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन और वरुणा नदी के पुनर्जीवन के लिए महत्वपूर्ण है. इससे नदी तट मजबूत होगा, कटाव रुकेगा और जल धारण क्षमता बढ़ेगी.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit:

गुजरात में साबरमती रिवर फ्रंट और लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट के बाद अब भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी में वरुणा रिवर फ्रंट बनाने की तैयारी है. इसके लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्रीपूर्ण बोरा एवं ओएनजीसी (ONGC) के सीएसआर प्रमुख श्री नीरज कुमार बंसल के बीच MOU साइन किया गया है. इस समझौते के तहत 260.61 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए फंड की व्यवस्था ओएनजीसी अपने सीएसआर फंड से करेंगे.

यह परियोजना काशी के शहरी सौंदर्यीकरण, पर्यावरण संरक्षण, नदी तट विकास, पर्यटन संवर्धन एवं जनसुविधाओं के विस्तार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस समझौते के तहत ओएनजीसी ने अपनी निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के माध्यम से प्रोजेक्ट के लिए धन देने का फैसला किया है. वीडीए के वीसी श्रीपूर्ण बोरा के मुताबिक वरुणा नदी काशी की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न अंग है.

ये होगा काम

इस प्रोजेक्ट के तहत वरुणा नदी के तटों का सुनियोजित विकास कर इसे आधुनिक नगरीय सुविधाओं, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक उपयोग के खुले स्थलों, पैदल पथ, प्रकाश व्यवस्था तथा पर्यटन आकर्षणों से युक्त एक विश्वस्तरीय रिवरफ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा. यह परियोजना भारत सरकार द्वारा जल निकायों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु संचालित Water Body Rejuvenation Mission के उद्देश्यों के अनुरूप भी है. इसके माध्यम से जल संसाधनों के संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, पारिस्थितिकीय संतुलन एवं सतत शहरी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है.

चरणवद्ध तरीके से होगा काम

वीडीए के उपाध्यक्ष के मुताबिक इस परियोजना को चरणवद्ध तरीके से अंजाम दिया जाएगा. इसके लिए DPR बनाने की कवायद शुरू हो गई है. परियोजना पूर्ण होने पर वरुणा नदी तट न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक समृद्ध होगा, बल्कि स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक डेस्टिनेशन होगा. वहीं ओएनजीसी के महाप्रबंधक अटल श्रीवास्तव ने इसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बताया.

वरुणा को मिलेगा पुर्नजीवन

पर्यावरणविदों के मुताबिक यह कोई सामान्य प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह वरुणा को पुनर्जीवन देने वाला प्रोजेक्ट है. नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी के वैज्ञानिक सलाहकार रहे प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को वरुणा एक बार फिर जी उठेगी. रिवर फ्रंट बनने से वरुणा के किनारे किनारे तट की मिट्टी को एक बांध के रूप में मजबूत किया जाएगा. इससे किनारे का कटाव रुकेगा और वरुणा में मिट्टी-गाद जो बहकर जाता था उसपर रोक लगेगी. वरुणा में सिलटेशन रुकने से वरुणा की गहराई बढ़ेगी और वरुणा की वाटर होल्डिंग कैपेसिटी भी बढ़ेगी.

प्रयागराज से बनारस तक सफर करती है वरणा

बता दें कि वरुणा नदी उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के फूलपुर स्थित मेलहम से निकलती है. इसके बाद करीब सौ किलोमीटर का सफर तय कर यह नदी रमईपुर से वाराणसी में प्रवेश करती है. फिर सदर इलाके से छह किलोमीटर की यात्रा करते हुए सरायमोहना पहुंचती है, जहां आदिकेशव घाट पर गंगा में मिल जाती है.

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