योगी सरकार में बनारस का दबदबा, हंसराज विश्वकर्मा के साथ कैबिनेट में 4 मंत्री; क्या है सियासी गणित?
योगी सरकार में वाराणसी का बढ़ता दबदबा एक नया रिकॉर्ड बना रहा है, जहां अब चार मंत्री बनारस से हैं. यह पीएम मोदी के 2014 से बनारस के सांसद बनने के बाद बढ़ा है. यूपी कैबिनेट विस्तार में 6 नए चेहरों में ओबीसी नेता और MLC हंसराज विश्वकर्मा जैसे नेताओं को मंत्री बनाया गया है.
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल में रविवार को विस्तार किया गया. कुल 6 नए मंत्री बनाए गए हैं, जबकि दो राज्य मंत्री को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभाव मिला है. वहीं, वाराणसी से रहने वाले मनोनीत MLC हंसराज विश्वकर्मा को भी योगी सरकार में जगह मिली है. हंसराज विश्वकर्मा के मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही योगी सरकार में बनारस के चार मंत्री हो गए हैं.
योगी सरकार में ये भी एक नया रिकॉर्ड है. इसके पहले योगी सरकार के पहले कार्यकाल में लखनऊ शहर से तीन मंत्री मंत्रिपरिषद में शामिल थे. बनारस ने लखनऊ को. पीछे छोड़ते हुए ये नया रिकॉर्ड बनाया है. योगी सरकार के पहले कार्यकाल में लखनऊ से बृजेश पाठक, आशुतोष टंडन और दिनेश शर्मा मंत्रिपरिषद के सदस्य थे.
योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भी बनारस से 3 मंत्री
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे विस्तार के बाद बनारस से चार मंत्री हैं. दयाशंकर मिश्र (ब्राह्मण), अनिल राजभर (OBC), रविन्द्र जायसवाल (OBC) और अब नए मंत्री हंसराज विश्वकर्मा (OBC). हालांकि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भी बनारस से तीन मंत्री रहे हैं. अनिल राजभर और रविन्द्र जायसवाल के साथ नीलकंठ तिवारी भी तब योगी सरकार में मंत्री थे.
लेकिन जब योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में नीलकंठ तिवारी को ड्राप किया गया तो उनकी जगह दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ मंत्री बनाए गएं. मंत्रियों की संख्या पर कोई फर्क नहीं पड़ा. लेकिन दूसरे कार्यकाल के दूसरे विस्तार के बाद हंसराज विश्वकर्मा के शामिल होने से बनारस का दबदबा लखनऊ में और बढ़ गया.
हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाने के पीछे ये तीन कारण
राजनैतिक विश्लेषक विजय नारायण का मानना है कि 2014 में बनारस से पीएम मोदी के सांसद बनने के बाद से ही यूपी सरकार में बनारस का दबदबा बढ़ना शुरू हो गया था. पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद ये दूसरा मौका है जब यूपी की पॉलिटिक्स में बनारस का दबदबा बढ़ा है. लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया है.
विजय नारायण का मानना है कि, ‘पीएम मोदी के जीत का अन्तर, सपा के पीडीए की काट और गाज़ीपुर प्रकरण हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाने के पीछे ये तीन कारण है. लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के महज डेढ़ लाख वोटों से जीतने और बीजेपी के काशी क्षेत्र के 13 में से दस सीटें हार जाने से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व असहज है.
हार की समीक्षा में ये बात सामने आई थी कि ओबीसी वोटर्स सपा के खेमे में चले गए थे. हंसराज विश्वकर्मा की छवि एक जमीनी नेता की है और बीजेपी को ये लगता है कि इनको मंत्री बनाने से ओबीसी मतदाताओं में अच्छा सन्देश जाएगा. गाज़ीपुर के करंडा में हुई विश्वकर्मा समाज की युवती के मौत की घटना को लेकर विपक्ष ने बड़ा बवाल मचाया था वो भी एक कारण हो सकता है.
विश्वकर्मा समाज के लोग पूर्वांचल में एक बड़ा वोट बैंक
वरिष्ठ पत्रकार और काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्रा कहते हैं कि पूर्वांचल में जातीय गोलबंदी बीजेपी के लिए चुनौती रहेगी. बीजेपी पश्चिम में तो साम्प्रदायिक ध्रुविकरण का लाभ उठा लेती है लेकिन पूरव के कास्ट पॉलिटिक्स के चक्रव्यूह को भेदना उसके लिए आसान नहीं है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए ही हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया है.
इसके साथ साथ वाराणसी के पुराने जमीनी नेताओं को भी सन्देश दिया गया है. लेकिन हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाए जाने के पीछे इन दोनों कारण से ज़्यादा महत्वपूर्ण ये तथ्य है कि विश्वकर्मा समाज के लोग पूर्वांचल में एक बड़ा वोट बैंक हैं. बनारस से हंसराज विश्वकर्मा को मंत्रिपरिषद में शामिल कर के बीजेपी ने एक बड़ा दांव खेला है.
