10 शव मिले, 6 अभी भी लापता; वृंदावन हादसे में 20 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
वृंदावन में यमुना नदी में हुए स्टीमर हादसे में अब तक 10 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 6 लोग अभी भी लापता हैं. NDRF, SDRF और पुलिस की टीमें 20 घंटे से अधिक समय से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं, जिसमें 22 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. यह हादसा श्रद्धालुओं से भरा स्टीमर पांटून पुल से टकराने के कारण हुआ. लापता लोगों की पहचान हुई है और परिजन मौके पर मौजूद हैं.
उत्तर प्रदेश में भगवान कृष्ण की रास स्थली वृंदावन में शुक्रवार की दोपहर यमुना में हुए हादसे में शनिवार को 20 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. NDRF, SDRF और पुलिस की टीमें गोताखोरों के साथ लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. इस ऑपरेशन में 22 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. वहीं अब तक 10 लोगों के शव यमुना में से निकाले गए हैं. छह लोग अभी भी लापता हैं, उनकी तलाश कराई जा रही है.
बता दें कि शुक्रवार की दोपहर श्रद्धालुओं से भर एक स्टीमर यमुना में केसी घाट पर बेकाबू हो गई और देखते ही देखते पांटून पुल से टकराकर पलट गई. पहले बताया गया कि हादसे की शिकार स्टीमर में कुल 37 श्रद्धालु सवार थे, लेकिन अब बताया जा रहा है कि कुल श्रद्धालुओं की संख्या 38 थी. इनमें से 22 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. वहीं 10 लोगों के शव भी निकाले गए हैं. बाकी छह लोगों के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है. इस रेस्क्यू ऑपरेशन को करीब 20 घंटे हो चुके हैं.
लापता श्रद्धालुओं की हुई पहचान
जिला प्रशासन के मुताबिक लापता श्रद्धालुओं की पहचान मनिक टण्डन, पकज मल्होत्रा, रिषभ शर्मा, यश भल्ला, मोनिका एवं एक अन्य युवती के रूप में हुई है. इनके परिजन भी मौके पर मौजूद हैं. पुलिस ने संभावना जताई है कि जो लोग लापता हैं, उनमें से कुछ तैरकर किसी अन्य घाट पर सुरक्षित हो सकते हैं. हालांकि पिरजनों का कहना है कि अभी तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है. इसकी वजह से आशंका जताई जा रही है कि मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
रेस्क्यू के बाद कराया अस्पताल में भर्ती
पुलिस ने यमुना से रेस्क्यू किए एक सभी लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया है. जहां उनके परिजन भी पहुंच गए हैं. वहीं जो लोग अभी लापता है, उनकी तलाश कराई जा रही है. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है. सभी शवों को पोस्टमार्टम के बाद सरकारी सहायता के साथ उनके निवास स्थान को भेजा जा रहा है. प्रशासन के मुताबिक यह सभी लोग पंजाब के लुधियाना से बांके बिहारी के दर्शन के लिए आए थे.
