UP में बचे केवल 4206 थर्ड जेंडर वोटर, SIR की फाइनल लिस्ट में कहां कटे सबसे ज्यादा वोट
उत्तर प्रदेश की SIR फाइनल वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल हुआ है. कुल 2 करोड़ 88 लाख 74 हजार 67 नाम काटे गए हैं, जिससे थर्ड जेंडर वोटरों की संख्या महज 4,206 रह गई है. लखनऊ और गाजियाबाद जैसे शहरी व भाजपा-बहुल क्षेत्रों में सर्वाधिक कटौती हुई. इन आंकड़ों ने राज्य में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है, चुनावी समीकरणों पर इसके दूरगामी असर का आकलन शुरू हो गया है.
उत्तर प्रदेश में SIR की फाइनल लिस्ट आ गई है. इस लिस्ट में कुल 2 करोड़ 88 लाख 74 हजार 67 वोट कटे हैं. इन वोटों के कटने के प्रदेश में पुरुष मतदाताओं की संख्या अब केवल 7 करोड़ 30 लाख 71 हजार 61 रह गई है. महिला वोटर भी महज 6 करोड़ 9 लाख 9 हजार 525 बची हैं. इसी प्रकार थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या अब केवल 4,206 बची है. इनमें 18-19 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की कुल संख्या 17 लाख 63 हजार 360 रह गई हैं. इनमें भी स्त्री-पुरुष अनुपात 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 834 है.
एसआईआर की फाइनल लिस्ट के मुताबिक सर्वाधिक नाम कटने वाले जिलों में राजधानी लखनऊ टॉप पर है. यहां कुल 9 लाख 14 हजार185 वोट कटे हैं. इसी प्रकार प्रयागराज में 8 लाख 26 हजार 885, कानपुर नगर में 6 लाख 87 हजार 201, आगरा में 6 लाख 37 हजार 653 और गाजियाबाद में 5 लाख 74 हजार 478 वोट कटे हैं. यदि प्रतिशत के हिसाब से देखे तो भी सर्वाधिक 22.89 फीसदी वोट लखनऊ में कटे हैं. इसी प्रकार 20.24 वोट कटने के साथ गाजियाबाद दूसरे स्थान पर है. तीसरे स्थान पर कानपुर नगर है. यहां कुल 19.42 फीसदी वोट कटे हैं. वहीं चौथे स्थान पर गौतमबुद्धनगर है. यहां 19.33 फीसदी और पांचवें स्थान पर रहे मेरठ में 18.75 फीसदी वोट कटे हैं.
इन विधानसभा सीटों पर ज्यादा कटे वोट
एसआईआर की फाइनल लिस्ट में विधानसभावार वोट कटने की डिटेल सामने आई है. इसमें पता चला है कि सबसे ज्यादा वोट गाजियाबाद में साहिबाबाद विधानसभा सीट पर कटे हैं. यह सीट अभी बीजेपी के पास है और सुनील शर्मा यहां से विधायक हैं. इस सीट पर कुल 3 लाख 16 हजार 484 वोट कटे हैं. इसी प्रकार नोएडा सीट पर 183887 वोट कटे हैं. यहां बीजेपी के ही पंकज सिंह विधायक है. जबकि लखनऊ उत्तर में 154710 तो आगरा कैंट में 147182 तथा इलाहाबाद नॉर्थ में 145810 वोट कटे हैं.
चौंका देंगे वोट कटने के ये आंकड़े
एसआईआर की फाइनल लिस्ट के मुताबिक पूर्वांचल की अपेक्षा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादा वोट कटे हैं. यही नहीं, ग्रामीण की अपेक्षा शहरी वोटों में ज्यादा कटौती हुई है. इसी प्रकार मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की अपेक्षा हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में ज्यादा वोट कटे हैं. इसी के साथ चौंकाने वाला एक और तथ्य यह है कि सपा की अपेक्षा बीजेपी द्वारा जीती गई विधानसभा सीटों पर ज्यादा वोट कटे हैं. इन आंकड़ों को लेकर प्रदेश में अब एक नए तरह की राजनीति शुरू हो गई है.
शुरू हुआ राजनीतिक आंकलन
एसआईआर की फाइनल वोटर लिस्ट आने के बाद चुनावी समीकरणों का आंकलन शुरू हो गया है. आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, कानपुर नगर, गौतमबुद्धनगर और मेरठ जैसे जिलों में 27 अक्टूबर 2025 की पुरानी सूची की तुलना में मतदाताओं के नाम काटे जाने का प्रतिशत सबसे अधिक रहा. इन जिलों में 18.75 प्रतिशत से लेकर 22.89 प्रतिशत तक वोट घट गए हैं. इन सभी क्षेत्रों में 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ज्यादातर सीटें जीती थीं और लोकसभा चुनाव के लिहाज से भी ये सीटें भाजपा के गढ़ मानी जाती हैं.
शुक्रवार को जारी हुई फाइनल लिस्ट
चुनाव आयोग ने यूपी एसआईआर की फाइनल लिस्ट शुक्रवार को जारी की है. इसमें 27 अक्टूबर 2025 को फ्रीज की गई उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 मतदाता थे. 6 जनवरी 2026 को जारी मसौदा सूची में यह संख्या घटकर 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 रह गई. वहीं अंतिम मतदाता सूची में अब कुल 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता रह गए हैं. इनमें से 6 जनवरी के बाद से 8 लाख 15 हजार 996 नाम सूची से बाहर कर दिए गए है.
