UP के हर जिले में बनेंगे 100 ‘मॉडल’ तालाब, पहले इन गांवों का आएगा नंबर
उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए एक नया कदम उठाया गया है. योगी सरकार ने हर जिले में 100 तालाबों को 'मॉडल तालाब' के रूप में विकसित करने की पहल की है. इसके लिए पूरे प्रदेश में ‘मेरा तालाब मेरी जिम्मेदारी’ अभियान चलाया जाएगा. सबसे पहले इन गावों का चयन होगा.
योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समुदाय के स्वास्थ्य के लिए विशेष पहल शुरू की है. सरकार ने तालाबों के पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व को नए सिरे से स्थापित करने का निर्णय लिया है. इसके तहत सभी जिलों में 100-100 ‘मॉडल तालाब’ विकसित किए जाएंगे. इसके तहत पूरे प्रदेश में ‘मेरा तालाब मेरी जिम्मेदारी’ अभियान चलाया जाएगा.
मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत पंचायती राज विभाग ने मॉडल तालाब की कार्ययोजना तैयार की है. सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों को सर्कुलर जारी कर दिया गया है. जिला पंचायतराज अधिकारी नीलेश प्रताप सिंह ने बताया कि मॉडल तालाब के लिए चयनित तालाबों के चारों ओर नो प्लास्टिक जोन घोषित किया जाएगा.
‘मॉडल तालाब’ पहल में पहले इन गांवों का नंबर
जारी सर्कुलर के मुताबिक, मॉडल तालाब विकसित करने के क्रम में प्रथम चरण में 5000 से ज्यादा गावों का चयन होगा. इनमें ऐसे गावों को शामिल जाएगा, जिनकी आबादी 5000 से अधिक होगी. ऐसे गांव में तालाब का चयन कर यह देखा जाएगा कि कितने परिवारों का ग्रे वाटर तालाब में गिर रहा है. कितनी नालियों से पानी तालाब में प्रवाहित किया जा रहा है.
साथ ही पता लगाया जाएगा कि प्रतिदिन औसतन कितना प्लास्टिक अपशिष्ट तालाब में डाला जा रहा है. जिस तालाब का चयन किया जाएगा, उसका बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड या जैविक ऑक्सीजन मांग) भी चेक किया जाएगा ताकि तालाब को मॉडल स्वरूप में विकसित करने के बाद तुलनात्मक सुधार का पता लगाया जा सके.
फिल्टर चैंबर, केली और केना के लगाए जाएंगे पौधे
जिला पंचायतराज अधिकारी नीलेश प्रताप सिंह ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायत से तालाब में प्लास्टिक अपशिष्ट न फेकने का प्रस्ताव पारित कराया जाएगा. तालाब में गिरने वाली नालियों पर प्लास्टिक ट्रैप वाली जाली, फिल्टर चैंबर लगाया जाएगा. इससे प्लास्टिक और गंदगी तालाब में जाने से पहले ही रुक जाएगी. इसी तरह ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी.
साथ ही इसके लिए नाली के अंत में बायो फिल्टर सिस्टम लगाया जाएगा. इसमें कंकड़, रेत के इस्तेमाल के अलावा केली और केना (एक किस्म का खरपतवार) के पौधे लगाए जाएंगे. इस उपचार से पानी प्राकृतिक रूप से शुद्ध होकर तालाब में जाएगा. प्लास्टिक और ग्रे वाटर से जुड़े रोकथाम की निगरानी समुदाय स्तर पर की जाएगी, जिससे स्थायी समाधान निकल सके.
