NIA के DSP तंजील अहमद हत्याकांड में हुई थी फांसी, HC ने कर दिया बाइज्जत बरी; फिर उलझ गई मर्डर मिस्ट्री

बिजनौर में 10 साल पहले हुए NIA DSP तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना हत्याकांड की गुत्थी फिर उलझ गई है. लोवर कोर्ट द्वारा फांसी की सजा पाए दोषी रेयान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया है. हाईकोर्ट ने केस डायरी में त्रुटियां और विरोधाभासी बयान पाए. इस फैसले से अब यह पुरानी मर्डर मिस्ट्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर असली हत्यारे कौन हैं.

एनआईए के डीएसपी हत्याकांड का आरोपी रेयान

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में 10 साल पहले NIA के DSP तंजील अहमद उनकी पत्नी फरजाना हत्याकांड की गुत्थी फिर से उलझ गई है. इस मामले में जिस व्यक्ति को लोवर कोर्ट ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया है. यही नहीं, हाईकोर्ट ने आरोपी रेयान को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए हैं. ऐसे में फिर सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर NIA के DSP तंजील अहमद को किसने मारा?

केस डायरी के मुताबिक 2 अप्रैल 2016 की रात बिजनौर में स्योहारा थाना क्षेत्र के सहसपुर गांव के पास एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद उनकी पत्नी पत्नी फरजाना की हत्या हो गई थी. उस समय वह दो छोटे बच्चों के साथ अपनी भांजी की शादी समारोह से वापस लौट रहे थे. आरोप है कि उनकी कार को बाइक सवार दो हमलावरों (मुनीर अहमद और रैयान) ने रोका और अंधाधुंध फायरिंग करते हुए उनकी हत्या कर दी थी. इस वारदात में तंजील अहमद की मौके पर ही मौत हो गयी थी. उनके शरीर में कुल 28 गोलियां लगी थीं.

10 दिन बाद हुई थी पत्नी की मौत

उनकी पत्नी फरजाना गंभीर रूप से घायल हुईं और 10 दिन बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. इस वारदात के दौरान उनके दोनों बच्चे कार की पिछली सीट पर थे और नीचे छिप गए. इसलिए उनकी जान बच गई थी. ये दोनों बच्चे इस वारदात के चश्मदीद गवाह थी बने. उस समय इस हत्याकांड को आतंकवादी साजिश माना गया था. दरअसल तंजील अहमद उन दिनों देश के कई बड़े आतंकी घटनाओं की जांच कर रहे थे. हालांकि बाद में यह मामला व्यक्तिगत दुश्मनी और संपत्ति विवाद का निकाला था

सेशन कोर्ट ने सुनाई फांसी

मामले की जांच में पता चला कि स्थानीय गैंगस्टर मुनीर अहमद और तंजील अहमद के बीच पुरानी रंजिश थी. इसी रंजिश में मुनीर ने रेयान के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था. पुलिस की चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए साल 2022 में बिजनौर की सेशन कोर्ट ने मुनीर और रैयान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी. सजा के बाद मुनीर की जेल में ही किडनी में इंफेक्शन की वजह से मौत हो गई थी. वहीं रैयान ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी. इस अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा देते समय गंभीर त्रुटि की है. चार्जशीट संदेह से भरी है और गवाहों के बयान अस्पष्ट तथा विरोधाभासी हैं.

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