‘ये दोहरापन अच्छा नहीं…’, रिटायरमेंट के लिए भागवत के बयान पर अखिलेश बोले- अपनी बारी आई तो नियम बदल दिये

आरएसएएस प्रमुख मोहन भागवत के रिटायरमेंट वाले बयान पर सपा नेता अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया है. उन्होंने कहा कि 'न रिटायर होऊंगा, न होने दूंगा. जब अपनी बारी आई तो नियम बदल दिए. अपनी बात से पलटनेवालों पर पराया तो क्या, कोई अपना भी विश्वास नहीं करता है.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर तीखा हमला बोला है. अखिलेश ने कहा, ‘न रिटायर होऊंगा, न होने दूंगा. जब अपनी बारी आई तो नियम बदल दिए… ये दोहरापन अच्छा नहीं… अपनी बात से पलटनेवालों पर पराया तो क्या, कोई अपना भी विश्वास नहीं करता… जो विश्वास खो देते हैं, वो राज खो देते हैं.’ अखिलेश का यह बयान उस समय आया, जब मोहन भागवत ने कहा कि मैं किसी को भी 75 साल की उम्र में रिटायर होने के लिए नहीं कहूंगा.

गौरतलब है कि RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने 28 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में RSS के शताब्दी समारोह के दौरान 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट की अटकलों पर स्पष्ट बयान दिया था. उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी नहीं कहा कि मैं या कोई और 75 साल की उम्र में रिटायर होगा.’ भागवत ने यह स्पष्टीकरण उस बयान के बाद दिया, जो उन्होंने जुलाई 2025 में नागपुर में एक किताब विमोचन के दौरान दिया था, जहां उन्होंने मजाक में RSS के वरिष्ठ नेता मोरोपंत पिंगले के हवाले से कहा था कि 75 साल की उम्र में शॉल ओढ़ने का मतलब रिटायरमेंट पर विचार करना है.

संघ ने हमें जो काम दिया, उसे करना होता है

RSS प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान को कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए संकेत माना, जो सितंबर 2025 में 75 साल के हो जाएंगे. गुरुवार को RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘संघ में हमें जो काम दिया जाता है, उसे करना पड़ता है, चाहे हम 80 साल के क्यों न हों. यह किसी के रिटायरमेंट का सवाल नहीं है. हम तब तक काम करते हैं, जब तक संघ चाहता है.’ वहीं मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवाद पर सुझाव भी दिया था.

इस पर अखिलेश यादव ने भागवत के बयान को ढोंग करार देते हुए कहा कि जब संभल में पांच लोगों की जान गई और कई लोग अपमानित हुए, तब RSS ने चुप्पी साध ली थी. उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधा, जो उनके अनुसार मंदिर-मस्जिद विवाद को भड़काकर लोगों का ध्यान बुनियादी मुद्दों से हटाती है. अखिलेश ने कहा कि भागवत का बयान तब तक अर्थहीन है, जब तक वह बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाइयों की सार्वजनिक निंदा नहीं करते.

75 साल से पार होने पर रिटायर

बीजेपी में 75 साल की उम्र में नेताओं के रिटायरमेंट की कोई औपचारिक नीति नहीं है, लेकिन 2014 के बाद से एक अनौपचारिक प्रथा देखी गई है, जहां 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को राजनीति से रिटायर कर दिया जाता है. उदाहरण के लिए, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया और उन्हें मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया गया. आनंदीबेन पटेल ने 2016 में 75 साल की उम्र के करीब गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. नजमा हेपतुल्ला ने भी 2016 में 76 साल की उम्र में केंद्रीय मंत्री पद छोड़ा था.