सपा नहीं BJP विधायकों के लिए चिंता की वजह बन गई SIR की ड्राफ्ट लिस्ट, जानें कैसे
यूपी में SIR की जो ड्राफ्ट लिस्ट आई है वह समाजवादी पार्टी से ज्यादा बीजेपी के लिए चिंता की सबब बन गई है. दरअसल, माना जा रहा है कि इस लिस्ट में सबसे ज्यादा शहरी मतदाताओं के नाम कटे हैं. ये बीजेपी के कोर वोटर माने जाते हैं. ऐसे में बीजेपी ने अब अपने विधायकों को दावे और आपत्तियों के तहत अधिक से अधिक पात्र नामों को वोटर लिस्ट में जोड़ने की जिम्मेदारी सौंप दी है.
यूपी में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के बाद अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है. तकरीबन 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं. इससे कुल मतदाता संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 12.55 करोड़ रह गई. विपक्षी दल इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘साजिश’ बता रहे हैं. वहीं सत्तारूढ़ भाजपा के लिए यह ज्यादा बड़ा सिरदर्द बन गया है. पार्टी नेताओं का मानना है कि हटाए गए नामों में उनके कोर वोटर ज्यादा है.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि SIR के तहत बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने घर-घर सर्वे किया. इसमें 46.23 लाख मृत मतदाता, 2.17 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित हुए और 25.47 लाख डुप्लीकेट पाए गए. ड्राफ्ट में 81.30% नाम बरकरार रखे गए, लेकिन 18.70% की कटौती ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. ऐसे में भाजपा को डर है कि नाम कटने से 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके वोट प्रतिशत और सीटों पर असर ना पड़ जाए.
शहरी और कुर्मी-ओबीसी वोटरों के नाम ज्यादा प्रभावित
सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर में ही कार्यकर्ताओं से कहा था कि हटाए जा रहे वोटरों में 85-90% हमारे हैं. पार्टी अब राज्य के 1.62 लाख बूथों पर फॉर्म-6 वितरित कर रही है. कार्यकर्ता घर-घर जाकर नए मतदाताओं, खासकर 18 साल पूरे कर चुके युवाओं, शादी के बाद पता बदलने वाली महिलाओं और नए बसे लोगों को जोड़ने में जुटे हैं. प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ल ने कहा, यह अभियान पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती के लिए है. हमारे बूथ स्तर के कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि कोई पात्र मतदाता वंचित न रहे. हालांकि, अंदरखाने भाजपा कर्ताधर्ता मान रहे हैं कि शहरी और कुर्मी-ओबीसी वोटरों के नाम ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जो पार्टी का कोर बेस हैं.
सपा का दावा- भाजपा को ही होगा असल नुकसान
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे भाजपा की ‘साजिश’ करार दिया है. सपा नेता रविदास मेहरोत्रा और अन्य ने कहा कि लाखों असली मतदाताओं के नाम काटे गए, जबकि उनके पास सभी दस्तावेज हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे ‘बड़ी साजिश’ बताया और जांच की मांग की. सपा का दावा है कि इससे भाजपा को ही नुकसान होगा, क्योंकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उनके वोटर ज्यादा प्रभावित हैं. फिलहाल चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावा-आपत्ति का समय दिया है. इस दौरान पात्र व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं.
