अलीगढ़ की मूर्तियों को GI टैग, मथुरा की कंठी माला को भी वैश्विक पहचान; UP के ये प्रोडक्ट भी सूची में

उत्तर प्रदेश में जीआई टैग की लहर जारी है, जहां अलीगढ़ की पीतल की मूर्तियां और हार्डवेयर, तथा मथुरा की कंठी माला को वैश्विक पहचान मिली है. यूपी अब 83 जीआई टैग के साथ देश में अग्रणी है, जो स्थानीय उत्पादों को 'लोकल से ग्लोबल' ले जाकर आत्मनिर्भर भारत और एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

कंठी माला को हुई जीआई टैगिंग

उत्तर प्रदेश समृद्ध विरासत और गौरवशाली परंपरा पर एक बार फिर वैश्विक मुहर लगी है. प्रदेश के अलग अलग शहरों में तैयार होने वाले प्रोडक्ट की लगातार जीआई टैगिंग हो रही है. हाल ही में जारी हुई नई लिस्ट में भी प्रदेश में तैयार होने वाले चार प्रोडक्ट शामिल हैं. इसमें अलीगढ़ के हार्ड वेयर और पीतल की मूर्तियों के अलावा मथुरा में बनने वाली कंठी माल को भी स्थान मिला है. बड़ी बात यह है कि इस लिस्ट में सबसे ज्यादा प्रोडक्ट अपने उत्तर प्रदेश के ही हैं.

जीआई एक्सपर्ट पद्मश्री डॉ रजनीकांत के मुताबिक यह अपने प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी गौरव के पल हैं. उन्होंने बताया कि इस समय जीआई के 83 अंकों के साथ यूपी नई बुलंदी पर पहुंच गया है. उन्होंने बताया कि वैसे तो मथुरा-वृंदावन की कंठी माला अपने आप में वैश्विक पहचान रखती है. अब इसे नई लिस्ट में भी शामिल किया गया है. इसी प्रकार अलीगढ़ में बनने वाली पीतल की मूर्तियों और हार्डवेयर को जगह दिया गया है.

कायम है काशी का वर्चस्व

डॉ. रजनीकांत के मुताबिक काशी के जीआई मॉडल का वर्चस्व कायम है. 32 जीआई टैग के साथ अभी वाराणसी सर्वाधिक है. इसी साल लद्दाख में 8, झारखंड में 8, मध्यप्रदेश में 22 और बिहार, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम समेत कई राज्यों के उत्पादों की जीआई टैगिंग हुई है. इस प्रकार कुल मिला कर 84 जीआई पंजीकृत हुए हैं. वहीं बीते एक साल में जीआई टैगिंग के लिए 215 नए आवेदन भी हुए हैं. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है.

लक्ष्य में सहयोगी होगा जीआई टैगिंग

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार ने लोकल से ग्लोबल, ODOP उत्पादों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जी आई टैग दिलाने में जुटी है. चालू वर्ष में ही प्रदेश सरकार आम चुनावों से पहले जीआई की बड़ी सौगात जनता को देने की तैयारी चल रही है. इससे प्रदेश के लाखों शिल्पियों, बुनकरों, महिलाओं, किसानों, कारीगरों, उद्यमियों के जीवन में बदलाव आने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि एक ट्रिलियन डॉलर इकोनामी का लक्ष्य हासिल करने में जीआई टैगिंग भी सहयोगी होगा.

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