21% का गणित और सियासी मजबूरी… आंबेडकर जयंती पर BSP, सपा और BJP का मेगा इवेंट

14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाबा साहेब फिर से केंद्र में आ गए हैं. बसपा, सपा और बीजेपी तीनों ही दल दलित वोट बैंक को साधने के लिए मेगा कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं. 2027 चुनावों को देखते हुए, यह तीनों पार्टियों के लिए एक "राजनीतिक मजबूरी" बन गई है.

यूपी सियासत में दलित वोट के लिए बसपा, सपा, भाजपा की होड़

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मंगलवार यानी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी. उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘बाबा साहेब’ फिर से सबसे बड़े सितारे बन गए हैं. बहुजन समाज पार्टी (BSP), समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तीनों ही विपरीत ध्रुवों की पार्टियां एक साथ मेगा कार्यक्रमों की तैयारी में जुट गई हैं.

मायावती की बहुजन समाज पार्टी, लखनऊ में लाखों कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन कर रही है. सपा गांव-गांव और सेक्टर स्तर पर PDA का झंडा बुलंद कर रही है, जबकि BJP सरकार पूरे प्रदेश में ‘युवा संवाद संगम’ और मूर्ति सौंदर्यीकरण
और 11 हज़ार दीप जलाने की बड़ी योजना चला रही है. अब सवाल है बाबा साहेब सबके लिए मजबूरी क्यों बन गए?

बसपा का पारंपरिक जड़ें मजबूत करने पर फोकस

बहुजन समाज पार्टी ने लखनऊ के डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल अंबेडकर पार्क में विशाल कार्यक्रम की तैयारी की है. मायावती के नेतृत्व में पूरे 18 मंडलों और 75 जिलों से लाखों कार्यकर्ता जुटने वाले हैं. पार्टी इसे 2027 के विधानसभा चुनाव का अनौपचारिक शंखनाद मान रही है. आकाश आनंद समेत पूरा संगठन पिछले कई दिनों से जिला-प्रदेश स्तर की बैठकों में जुटा है. बसपा के लिए तो यह अपनी पारंपरिक जड़ों जाटव और दलित वोट बैंक को फिर से मजबूत करने का मौका है.

सपा ने बदली रणनीति, दलित वोटों में सेंध की कोशिश

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आम्बेडकर जयंती को सेक्टर और गांव स्तर पर मनाने का निर्णय लिया . लखनऊ में पार्टी ऑफिस के आसपास हजारों पोस्टर लग चुके हैं. सपा का फोकस PDA पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले पर है. संविधान पर ‘संकट’ और सामाजिक न्याय की बात को बूथ स्तर तक ले जाने की योजना है. मायावती की बसपा पर निशाना साधते हुए सपा दलित वोटों में सेंध लगाने की कोशिश में जुटी है.

बीजेपी का राज्यव्यापी ‘सामाजिक समरसता’ अभियान

सत्ताधारी बीजेपी ने इसे सरकारी कार्यक्रम का रूप दे दिया है. योगी सरकार ने ‘डॉ. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ के तहत 403 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. हर विधानसभा क्षेत्र में 10-10 मूर्तियों पर छत्र, दीवार और सौंदर्यीकरण होगा. 14 अप्रैल को सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में ‘युवा संवाद संगम’ होंगे.

जहां मंत्री, सांसद और विधायक अंबेडकर के विचार, संविधान और सामाजिक न्याय पर चर्चा करेंगे. बूथ स्तर पर फूल चढ़ाना, सफाई अभियान और ‘एक भारत, संयुक्त भारत’ थीम के साथ BJP दलित बस्तियों तक पहुंच बनाने की कोशिश में है. आज BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी ने डॉ अम्बेडकर की प्रतिमा पर 11000 दीपक जलाये.

21% का गणित या पार्टियों के लिए राजनीतिक मजबूरी!

उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) मतदाता करीब 21 प्रतिशत हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में इन वोटों का बिखराव BJP के लिए महंगा साबित हुआ था. अब 2027 चुनाव से पहले हर पार्टी इस वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने के लिए ‘अंबेडकर जयंती’ को हथियार बना रही है. बसपा के लिए यह विचारधारा और वोट दोनों का मुद्दा है.

सपा के लिए PDA को मजबूत करने का अवसर. वहीं, बीजेपी BJP के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास’ के साथ ऊपरी जातियों के साथ-साथ दलितों को भी जोड़ा पर जोर. राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार मानते हैं कि बाबा साहेब की विरासत, संविधान, समानता और सामाजिक न्याय अब किसी एक पार्टी की नहीं रही. यह सबके के लिए ‘राजनीतिक मजबूरी’ है.

उन्होंने कहा, ‘क्योंकि दलित मतदाता अब सिर्फ वादों पर नहीं, प्रदर्शन और सम्मान पर वोट करते हैं. कल का दिन सिर्फ जयंती नहीं, बल्कि 2027 की ‘अनऑफिशियल’ चुनावी शुरुआत भी है. चाहे मायावती का शक्ति प्रदर्शन हो, अखिलेश का ग्रासरूट कैंपेन हो या योगी सरकार की भव्य योजनाएं, सबका एक ही संदेश है, बाबा साहेब किसी एक के नहीं, वे सबके हैं.

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