अमेठी में 138 लोगों के वोट काटने पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- बिना नोटिस कैसे हटाए नाम?
हाईकोर्ट ने अमेठी की अंतिम मतदाता सूची से 138 नाम हटाने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है. आरोप है कि बिना किसी सूचना के नाम हटाए गए, जबकि वे मसौदा सूची और पिछली सूचियों में शामिल थे.
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में मतदाता सूची से 138 लोगों के नाम हटाए जाने का मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गया है. अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है. हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाया है कि आखिर किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत इन लोगों के नाम हटाए गए.
हाईकोर्ट के जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने अमेठी जिले की महमूदपुर बेनीपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत गोपालपुर गांव के 138 निवासियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नाम हटाने से पहले उन्हें कोई नोटिस भी नहीं दिया गया, जबकि वे मसौदा सूची और पिछली सूचियों में शामिल थे.
एक दशक से मतदाता सूची में थे नाम
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके नाम लगभग एक दशक से मतदाता सूची में शामिल थे. इसके अलावा, मसौदा मतदाता सूची में भी उनके नाम दर्ज थे, लेकिन अंतिम सूची प्रकाशित होने पर वे गायब मिले. अदालत ने इससे पहले राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूछा था कि किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत इन मतदाताओं के नाम हटाए गए.
पीठ ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब संबंधित लोगों के नाम पहले की मतदाता सूचियों और मसौदा सूची में शामिल थे, तो अंतिम सूची के प्रकाशन के समय उन्हें किस आधार पर हटा दिया गया.
बिना सूचना के कैसे हटाया जा सकता है नाम?
अदालत ने नौ अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूछा था कि किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत इन मतदाताओं के नाम हटाए गए. हाई कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि संबंधित मतदाताओं को पूर्व सूचना दिए बिना ऐसा कैसे हटाया जा सकता है?
राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच करने और संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया था. अदालत ने पहले मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी. वहीं, अब राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है औरने मामले की अगली सुनवाई के लिये 29 अक्टूबर की तारीख नियत की है.
