‘अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में नहीं घुसने देंगे’; जगत गुरु परमहंस आचार्य ने कहा- CM योगी से माफी मांगे शंकराचार्य

प्रयागराज प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने विवादित विवाद दिया है. उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में तब तक घुसने नहीं देंगे जब तक वह अपने बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर सीएम योगी से माफी नहीं मांग लेते हैं.

जगतगुरु परमहंस आचार्य

मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद हो गया था. इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद 11 दिनों तक माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे रहे. इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर कई विवादित टिप्पणियां की थीं. अब इस विवाद में जगतगुरु परमहंस आचार्य भी कूद पड़े हैं.

अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में घुसने नहीं देंगे- परमहंसाचार्य

जगतगुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवादित बयान दिया है. परमहंस आचार्य ने कहा ‘स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में तब तक घुसने नहीं देंगे जब तक वह अपने बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांग लेते हैं’.

परमहंस आचार्य ने आगे कहा कि जिस प्रकार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की. उन्हें ‘हिमाऊ का बेटा अकबर’ कहा, उससे संत समाज और आम जनमानस में गहरी नाराजगी है. योगी आदित्यनाथ केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि गोरक्षपीठाधीश्वर भी हैं. उनके प्रति इस तरह के अपशब्दों का प्रयोग अत्यंत निंदनीय है.

उन्होंने कहा ‘जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस नहीं लेते और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सार्वजनिक तौर पर क्षमा नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा’.

18 जनवरी को क्या हुआ था?

बता दें 18 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद स्नान करने जा रहे थे. इस दौरान प्रशासन ने उन्हें पालकी से उतर कर पैदल जाने के लिए कहा. इन सबके बीच प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के बीच कहासुनी हो गई. आरोप है कि पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ मारपीट की. अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया था. इसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था.

अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे गए थे दो नोटिस

मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर पूछा था कि वह अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है. अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन को 8 पेजों का जवाब ई-मेल के जरिए भेजा है.उन्होंने नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि जिससे अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका जाए.

इसके अलावा प्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजा था. दूसरे नोटिस में मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद से कहा था आपकी वजह से मेले की व्यवस्था खराब हुई. लोगों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हुआ. इसलिए स्पष्ट करें कि मेला क्षेत्र में आपको दी गई जमीन को निरस्त कर, आपको हमेशा के लिए मेले में घुसने पर प्रतिबंध क्यों न लगाया जाए.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दूसरे नोटिस के जवाब में कहा कि पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यह परंपरा 2500 साल पुरानी है और शंकराचार्य के काल से है. उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने, अनुयायियों के साथ मारपीट और अपमान करने का आरोप लगाया है.