VIP दर्शन के नाम पर वसूली, मोबाइल फॉर्मेट कर मिटाया सबूत; चढ़ावा चोरी कांड के 4 नए एपिसोड
राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में SIT जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इसमें पता चला है कि आरोपियों ने मोबाइल फॉर्मेट कर सबूत मिटाने की कोशिश की. VIP दर्शन के नाम पर अवैध वसूली और रिश्तेदारों की भूमिका भी सामने आई है. ट्रस्ट की बैठक में दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया है. ये खुलासे मंदिर की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
राम मंदिर में चढ़ावे चोरी कांड अब सिर्फ दानपात्र से गायब हुई रकम तक सीमित नहीं रहा. पुलिस और एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य और सबूत सामने आ रहे हैं. इससे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक सिस्टम और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं. SIT अब इस पूरे मामले की परत-दर-परत उधेड़ने में जुट गई है. इसी क्रम में जांच एजेंसी ने एक बार फिर राम मंदिर परिसर पहुंचकर कर्मचारियों से पूछताछ की है.
ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं. वहीं गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि चोरी की रकम, उसके कथित बंटवारे और पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सके. अब तक हुई पूछताछ में कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं. आज यहां आपको समझने के लिए इन खुलासों को आसान शब्दों में समझाने की कोशिश करेंगे. इससे पूरी कहानी साफ हो जाएगी.
पहला एपिसोड: मोबाइल फॉर्मेट कर मिटाए सबूत
जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों ने गिरफ्तारी से ठीक पहले अपने मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिए थे. कोशिश थी कि सभी संबंधित व्हाट्सएप चैट, फोटो और वीडियो डिलीट हो जाएं. हालांकि अब SIT ने फॉरेंसिक टीम की मदद से डाटा रिकवर कराने की कवायद शुरू कर दी है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की रकम कैसे बाहर निकाली जाती थी, किन लोगों तक पहुंचती थी और पूरे ऑपरेशन का संचालन कौन करता था.
दूसरा एपिसोड: VIP दर्शन के नाम पर वसूली
एसआईटी और पुलिस की जांच में एक और बड़ा कांड सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक आरोपी टिन्नू यादव ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर VIP दर्शन के नाम पर मंदिर में अवैध वसूली का एक बड़ा नेटवर्क चला रहा था. दावे के अनुसार, आसपास के होटल और होम-स्टे संचालकों के जरिए श्रद्धालुओं की जानकारी जुटाई जाती थी. फिर उनकी आर्थिक क्षमता के हिसाब से 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक लेकर VIP प्रवेश दिलाया जाता था. जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था.
तीसरा एपिसोड: रिश्तेदारों की भी मिली भूमिका
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी के कुछ रिश्तेदार मंदिर परिसर में कार्यरत थे. आरोप है कि व्यवस्थाओं तक पहुंच बनाने में इस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और SIT इससे संबंधित सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही है. इसके लिए आरोपियों से पूछताछ के अलावा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है.
चौथा एपिसोड: ट्रस्ट की बैठक और बढ़ती हलचल
पूरा मामला सामने आने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर भी हलचल तेज बताई जा रही है. 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं. ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने कहा है कि जिसने भी गलत किया है, उसे किसी भी कीमत पर संरक्षण नहीं मिलेगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसी क्रम में पहली बार आरएसएस की भी प्रतिक्रिया आई है. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दानपात्र से चोरी की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
क्या मिलेंगे इन सवालों के जवाब?
SIT के सामने अब भी कई अहम सवाल हैं, जिनके जवाब आने बाकी है. इसमें पहला तो यही है कि क्या चोरी एक संगठित नेटवर्क के जरिए की गई? क्या VIP दर्शन के नाम पर वसूली का कथित सिस्टम वास्तव में संचालित हो रहा था? क्या सबूत मिटाने की कोशिश किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी? इसके अलावा सबसे अहम और बड़ा सवाल यह कि क्या जांच इस पूरे कथित नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंच पाएगी?
