काच्चीपुरम में बना, तिरुपति में हुई पूजा; राष्ट्रपति ने राम मंदिर में स्थापित किया दुनिया का इकलौता ‘राम यंत्र’
अयोध्या के राम मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुनिया के इकलौते 'श्रीराम यंत्र' की स्थापना की. चैत्र नवरात्र के पहले दिन स्थापित यह 150 किलो का स्वर्ण जड़ित यंत्र कांचीपुरम में निर्मित होकर तिरुपति में पूजित हुआ था. भगवान राम की विजय और मर्यादा का प्रतीक यह यंत्र वैदिक गणनाओं पर आधारित है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का अद्वितीय समन्वय दर्शाता है. यह आध्यात्मिक धरोहर अब राम मंदिर का अभिन्न हिस्सा है.
भगवान राम की मर्यादा के अनुरूप और उन्हीं को समर्पित दुनिया का इकलौता श्रीराम यंत्र अयोध्या स्थित राम मंदिर में आज स्थापित हो गया. चैत्र नवरात्र के पहले दिन देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामलला के दर्शन के बाद मंदिर के दूसरे तल पर इस यंत्र की स्थापना की. राष्ट्रपति मुर्मू ने विशेष अनुष्ठान और वेद मंत्रों के साथ श्रीराम यंत्र का पूजन किया.
श्रीराम यंत्र की स्थापना के लिए अयोध्या पहुंची राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने करीब साढ़े 10 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्वागत किया और उन्हें आगवानी करते हुए राम मंदिर ले आईं. जहां श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को पहले इस यंत्र की महत्ता और महत्व बताया. इसके बाद विधि विधान से इस यंत्र की स्थापना कराई गई.
ये है खासियत
मां लक्ष्मी को समर्पित श्रीयंत्र की तर्ज पर ही श्रीराम मंत्र को तैयार किया गया है. इस यंत्र को कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में बनाया गया. इसके बाद तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया, जहां विशेष पूजन के बाद रथयात्रा के जरिए अयोध्या लाया गया है. करीब 150 किलो वजन के इस श्रीराम यंत्र पर सोने की परत चढ़ाई गई है. इसे 10 दिन पहले ही अयोध्या में राम मंदिर लाया गया, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर में रखवाया गया था.
शाष्त्रीय पद्धति से हुआ निर्माण
मंदिर के पदाधिकारियों के मुताबिक श्रीराम यंऋ महज एक धातु की आकृति नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक गणितीय और आध्यात्मिक समन्वय है. श्रीराम यंत्र को भगवान श्रीराम की विजय और मर्यादा के प्रतीक के तौर पर तैयार किया गया है. इसमें वैदिक गणनाओं के आधार पर कई विशेष धातुओं का मिश्रण कर निर्मित किया गया है. इस यंत्र की आभा खुद अपना परिचय देती है. इस तरह का यंत्र अभी तक दुनिया में कहीं नहीं बना.
