आजादी के बाद पहली बार इस गांव का कोई बच्चा फर्स्ट डिविजन पास, शादियों में ढोता है रोड लाइट
बाराबंकी के निजामपुर (अहमदपुर ) गांव में आजादी से लेकर साल 2025 तक किसी ने हाई स्कूल की परीक्षा भी नहीं पास की थी.पिछले साल यहां के रामसेवक ने 10वीं के एग्जाम में सफलता पाई थी.वह 10वीं पास करने वाले गांव के पहले शख्स बने. अब इस बार उनके मौसेरे भाई करन ने भी हाईस्कूल की परीक्षा 64 प्रतिशत अंकों के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर लिया है.बता दें कि आजादी के बाद पहली बार इस गांव का कोई बच्चा फर्स्ट डिविजन पास हुआ है.
अगर हौसला बुलंद हो तो अभाव भी रास्ता नहीं रोक सकते हैं. बाराबंकी के बनीकोडर ब्लॉक में आने वाले निजामपुर (अहमदपुर) गांव के करन कुमार ने हाई स्कूल की परीक्षा 64 प्रतिशत अंकों के साथ पास कर एक मिसाल पेश की है. दरअसल, सात दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे इस गांव से हाईस्कूल पास करने वाले करन अब दूसरे छात्र बन गए हैं.
शादियों के सीजन सिर पर रोड लाइट ढोते थे करन
करन के लिए शिक्षा का सफर आसान नहीं रहा. घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे शादियों के सीजन में टेंट हाउस की रोड लाइट सिर पर ढोते थे. इसके अलावा मजदूरी कर भी परिवार को आर्थिक मदद देते थे. सीजन खत्म होने पर वे लोडिंग वाला साइकिल रिक्शा चलाकर अपना खर्च निकालते थे. करन ने राजकीय इंटर कॉलेज अहमदपुर में पढ़ाई की और घर में बिजली न होने के बावजूद मेहनत जारी रखी.
साल 2025 में करन के मौसेरे भाई ने हाई स्कूल की परीक्षा की थी पास
खास बात यह है कि पिछले वर्ष (2025) इसी गांव के रामकेवल (रामसेवक) ने आजादी के बाद पहली बार हाईस्कूल पास कर गांव का खाता खोला था. करन और रामसेवक सगे मौसेरे भाई हैं. करन ने बताया कि उन्होंने अपने भाई को देखकर ही पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया था. उसके बाद उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी मन लगाकर पढ़ाई करनी जारी रखी.
भाई की कामयाबी पर रामसेवक बेहद खुश हैं
रामसेवक ने भी भाई की कामयाबी पर खुशी जताते हुए कहा कि अब गांव के अन्य बच्चे भी पढ़ाई के प्रति जागरूक हो रहे हैं. मजदूरी कर परिवार की मदद वाले करन का लक्ष्य अब पुलिस विभाग में भर्ती होकर देश की सेवा करना है.उनके शिक्षकों का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी करन ने जिस लगन से पढ़ाई की वह काबिले तारीफ है. करन की इस सफलता से उनके परिवार के साथ-साथ पूरे गांव वाले बेहद खुश हैं.